जिला सेशन कोर्ट में शनिवार को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से साल 2025 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। सीकर जिले के 17 न्यायायिक क्षेत्रों में 17 बेंचों ने राजीनामा योग्य मामलों का मौके पर निस्तारण किया जा रहा है। बिजली, पानी, बैं
काउंसलिंग से हो रहा समाधान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व एडीजे शालिनी गोयल ने बताया कि लोक अदालत में 17 बेंचों के जरिए मामले निपटाए जा रहे हैं। प्री-लिटिगेशन और पेंडिंग केसों के लिए अलग-अलग बेंच बनाई गई हैं। प्री-लिटिगेशन में ऐसे मामले शामिल हैं, जो अभी कोर्ट में नहीं पहुंचे, जैसे बैंक लोन, केसीसी, बीएसएनएल बिल और बिजली बिल। इनमें बिना कोर्ट फीस के निपटारा हो रहा है। वहीं, पेंडिंग केसों में लंबित मुकदमों का समाधान किया जा रहा है।

एडीजे कोर्ट संख्या-2 में मामलों का निपटारा करते हुए जज।
उन्होंने बताया कि साल में चार लोक अदालतें आयोजित होती हैं। आज की लोक अदालत में 10 हजार 300 से अधिक पेंडिंग केस और 300 से ज्यादा प्री-लिटिगेशन के मामले निपटाए जाएंगे। फैमिली कोर्ट में 44 केस आए। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है और इसमें अपील का प्रावधान नहीं है। कोर्ट फीस भी वापस मिलती है, साथ ही आपसी सुलह से रिश्ते भी बरकरार रहते हैं।
महिला को मिला 18.70 लाख का क्लेम
अधिवक्ता महेंद्र बाजिया ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बेरी निवासी एक महिला को मोटर परिवहन कोर्ट ने 18.70 लाख रुपए का क्लेम दिलवाया। सात महीने पहले सड़क हादसे में महिला के पति की मौत हो गई थी। न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने यह क्लेम पास किया।

एसबीआई बैंक द्वारा केसीसी लोन से संबंधित मामलों का निपटारा किया गया।
बैंक लोन के 200+ मामलों का निपटारा
एसबीआई के महाप्रबंधक संदीप कुमार ने बताया कि लोक अदालत में 200 से अधिक बैंक लोन के मामलों का निस्तारण होगा। बैंक ने एनपीए खातों से 5 करोड़ की वसूली का लक्ष्य रखा है।
2015 में एक किसान ने केसीसी लोन लिया था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण चुकाने में असमर्थ रहा। 2023 में उसका खाता एनपीए हो गया और बैंक ने कई नोटिस भेजे। मामला लोक अदालत में पहुंचा, जहां काउंसलिंग के जरिए इसका निपटारा किया गया। 11 लाख 56 हजार का मामला 8 लाख 50 हजार में सुलझा। वहीं, एक किसान के केसीसी लोन का मामला 14 लाख में निपटाया गया। किसान ने बैंक से 2016 में 17 लाख 49 हजार का लोन लिया था।
एडीजे शालिनी गोयल ने कहा- लोक अदालत में आमजन को सस्ता, सुलभ न्याय मिलता है और इसके लिए कोई अपील नहीं करनी पड़ती । लोक अदालत में प्रकरण आने के बाद तुरंत प्रकरण का निपटारा होता है। लोक अदालत में आए केस में ने तो किसी की जीत होती है और न ही किसी की हार । किसी के प्रति द्वेष भावना भी नहीं रहती।
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