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डूंगरपुर के भीलूड़ा गांव में सदियों से चली आ रही अनूठी हरिया परंपरा से बारिश का अनुमान लगाया गया।
डूंगरपुर के भीलूड़ा गांव में सदियों से चली आ रही अनूठी हरिया परंपरा का निर्वहन किया गया। इस परंपरा के जरिए अगले साल के मानसून का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इस वर्ष मिली-जुली बारिश होने के संकेत मिले हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित परंपरागत हरिया मेले में आदिवासियों और ग्रामीणों ने उत्साह के साथ भाग लिया। मेले में सबसे पहले रघुनाथ मंदिर और लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद अंग्रेजी वर्णमाला के ‘टी’ आकार की लकड़ी के हरिया की पूजा करके उसे रघुनाथजी मंदिर परिसर में गाड़ा गया।
मंदिर चौक में युवतियों ने हरिया पर रक्षासूत्र बांधे। फिर अगले साल के मौसम की भविष्यवाणी जानने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभिन्न समाजों के चार प्रतिनिधि मिट्टी के कलशों में तालाब से पानी भरकर लाए। इन कलशों पर वर्षा के मौसम के चारों माह आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन के नाम लिखे हुए थे।
परंपरा के अनुसार इन कलशों को हरिया की लकड़ी पर फोड़ा गया। फिर टुकड़ों को इकट्ठा करके देखा गया कि कलश पर लिखे महीनों के नामों के कितने अक्षर सुरक्षित हैं और कितने टूट चुके हैं। माह के प्रत्येक अक्षर को 10 दिन का मानकर अगले साल के वर्षा योग का अनुमान लगाया जाता है। जितने शब्द टूटे हुए होते हैं, उतने दिन वर्षा होने का अनुमान माना जाता है।
इस अनूठी परंपरा को देखने और बारिश की भविष्यवाणी सुनने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग भीलूड़ा पहुंचते हैं। इस वर्ष भी मिला-जुला मानसून का पूर्वानुमान लगाया गया है।
अगले साल ऐसा रहेगा मानसून
आगामी वर्ष के वर्षा योग का आकलन करते हुए बताया कि आषाढ़ के 20 दिन सूखा और 10 दिन वर्षा बरसात रहेगी। श्रावण में भी 10 दिन वर्षा व 20 दिन सूखा, भाद्रपद में 5 दिन वर्षा व 25 दिन सूखा ओर अश्विन माह में भी 5 दिन बरसात व बाकी 25 दिन सूखे की संभावना जताई गई।
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