अरबाज और मधु को लेने हमेशा उसके चाचा जाते थे। सोमवार को किसी काम की वजह से न जा पाए। ऐसे में, 7 साल का अरबाज बहन को लेने स्कूल पहुंचा था। इसी दौरान बहन आती उससे पहले ही 50 किलो से ज्यादा का गेट और भारी पत्थर उस पर गिर पड़े। मासूम ने मौके पर ही दम तोड़
जब दैनिक भास्कर ने परिजनों से बात की तो 9 साल की बहन का गुस्सा फूट पड़ा। भाई की मौत का सदमा झेल रही बहन उखड़ गई, बोलीं- शर्म आनी चाहिए सरकार को, 1 साल से गेट ख़राब था। सरकार नींद में है, मेरा भाई छीन लिया।
अरबाज के पिता लोक-कलाकार थे, उनकी कोरोना में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि तब का मुआवजा भी अब तक नहीं मिला। मोहल्लेवासियों से चंदा इकट्ठा करके जैसे-तैसे घर का गुजारा चलाया। अब बेटे की मौत ने तोड़ कर रख दिया।

ये तस्वीर, उस स्कूल की है जहां 7 साल के मासूम ने दरवाजे के नीचे आकर दम तोड़ दिया।
पढ़िए, सिस्टम के गेट के नीचे दबे 7 साल के मासूम की कहानी…
पहले पढ़िए दर्दनाक हादसे की कहानी… जैसलमेर के पूनमनगर में सोमवार को दोपहर 1 बजे राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल की छुट्टी हुई थी। पास ही स्कूल में पहली क्लास में पढ़ने वाला अरबाज अपनी बहन के साथ घर जाने के लिए उसके स्कूल के बाहर पहुंचा। इसी दौरान करीब 50 किलो से ज्यादा का गेट और इससे दुगुने वजन के पत्थर अरबाज पर आ गिरे। अरबाज ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उसका मामा जब ये सूचना सुनकर स्कूल पहुंचा तो मीडिया के सवालों का जवाब देते-देते बेहोश हो गया।

बहन मधु रोते हुए बोली-

1 साल से गेट ख़राब था, कोई ठीक नहीं करवा रहा था। मेरा भाई चला गया। सरकार सो रही है।

घर 200 मीटर दूर हुआ हादसा
मामा शमशेर खान ने बताया- अरबाज खान (7) पुत्र तालब खान की 2 बहनें गर्ल्स स्कूल में पढ़ती हैं। वहीं अरबाज करीब 100 फीट की दूरी पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में पहली क्लास में पढ़ता था, दोनों स्कूलों से घर 200 मीटर दूर है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद वह अपनी बहन को लेने आया था। इसी दौरान स्कूल का मैन गेट और पत्थर गिर गए।

नानी और मां मुंह ढके बिलखती रही। उनका अरबाज अब वापस नहीं लौटेगा।
चाचा बोला— मुझे क्या पता था वो लौटकर नहीं आएगा
अरबाज के चाचा सदीक खान कहते हैं- मैं उसको रोज स्कूल छोड़ने जाता था और लेने जाता था। मगर मैं सोमवार को जैसलमेर चला गया। इसलिए उसको लेने नहीं जा सका। मुझे क्या पता था वो घर लौट कर ही नहीं आएगा। ऐसा होता तो मैं उसको स्कूल भी नहीं भेजता।

बहन बिलख रही थी, भाई उसे लेने ही क्यों आया। प्रशासन और सरकार को कोसती रही।
‘पिता लोक कलाकार, कोरोना में मौत, मुआवजा अब तक नहीं’ चाचा सदीक खान ने बताया- तालब खान एक लोक कलाकार थे। उनके चार बच्चे थे। तालब खान की मौत कोरोना काल में हुई।उनको अभी तक कोरोना में मौत का मुआवजा तक नहीं मिला। गांव वालों ने चंदा करके कुछ रकम दी जिससे परिवार का गुजारा चलने लगा। परिवार में अरबाज खान (7) साल का था। घर में अरबाज का एक और भाई रईस खान 9 साल का है। 2 बहन है। एक बड़ी बहन मधु पूनम नगर की उच्च माध्यमिक बालिका स्कूल में छोटी बहन राजू के साथ ही पढ़ती है। राजू 7 वीं में पढ़ती है।

मां बोली— उसकी क्या गलती थी मां रोते हुए कहती है- पति कोरोनाकाल में चला गया और अब लापरवाही ने बेटा भी छीन लिया। वो केवल 7 साल का था और उसकी गलती भी क्या कि बस वो अपनी बहन को लेने पास की स्कूल के गेट तक गया था। उसे क्या पता था कि जिस गेट पर वो बड़ी बहन का इंतजार कर रहा है, वहां उसका इंतजार मौत कर रही है। वो ही गेट उसे हमेशा-हमेशा के लिए अपनों से दूर कर देगा, ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था।
वहीं उसकी नानी का भी रो रोकर बुरा हाल है। पहले जमाई खोया और अब नाती। अपनी ही बेटी का घर उजड़ते देख विधवा नानी अपने आप को संभाल ही नहीं पा रही है। महिलाओं ने उसको संभाला और घर में ले गई। घर के बाहर मातम छाया हुआ है। स्वर्गीय तालब खान के चाचा ईशा खान का कहना है कि ये बहुत ही गरीब परिवार है। पहले तालब मिला तब भी मुआवजा नहीं मिला और आज उसका बेटा चला गया लेकिन उसपर भी कोई मुआवजा नहीं दिया केवल आश्वासन दिया। अब देंगे कब ये नहीं मालूम।
विधायक बोले- जो भी आरोपी होगा कार्रवाई की जाएगी
मामले को लेकर जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी ने कहा- मैंने प्रशासन से आग्रह किया है कि हादसा जिस वजह से हुआ और जो इसमें आरोपी हैं उन पर कार्रवाई की जाए।
इसको ठीक करा लेना चाहिए था, इसमें ग्राम विकास अधिकारी की लापरवाही रही।
भाटी ने भास्कर के सवाल पर कहा- हो सकता है पौधे लेकर आई कैंपर या ट्रैक्टर ट्रॉली से लगकर गेट टूटा हो लेकिन, इसे समय पर सही करवाना था।


उदयपुर में स्कूल के 3 कमरों का प्लास्टर गिरा, 45 बच्चे बैठे थे उदयपुर में वल्लभनगर के सरकारी स्कूल नया राजपुरा में सोमवार को 3 कमरों की छतों का प्लास्टर गिर गया। इस दौरान बच्चे क्लास में पढ़ रहे थे। उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया। तीनों क्लास में 45 बच्चे बैठे थे। इस स्कूल में कुल 77 बच्चे पढ़ते हैं। आज 64 बच्चे आए थे। गनीमत रही कि किसी स्टूडेंट्स को चोट नहीं आई। हालांकि लोगों ने स्कूल के ताला जड़ दिया। उदयपुर में 2 दिन में 3 सरकारी स्कूलों की दीवार ढहने और प्लास्टर गिरने के मामले सामने आ चुके हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
झालावाड़ के सरकारी स्कूल में हुई थी 7 बच्चों की मौत 25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी, वहीं 9 गंभीर घायल हो गए थे। यहां सुबह से बारिश हो रही थी। प्रार्थना का समय हुआ तो सभी क्लास के बच्चों को स्कूल के ग्राउंड में इकट्ठा करने की बजाय कमरे में बैठा दिया, ताकि वे भीगे नहीं।
इसके कुछ देर बाद कमरे की छत गिर गई और 35 बच्चे दब गए थे। ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाया और बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया। 5 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। (पूरी खबर पढ़ें)
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