शिल्पी फाउंडेशन ने राजापार्क स्थित पिंक कैफे में त्योहार : परम्परा भी, ट्रेंड भी शीर्षक से एक विशेष टॉक शो आयोजित किया।
राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और बदलते सामाजिक परिदृश्य पर सार्थक विमर्श की दिशा में शिल्पी फाउंडेशन ने राजापार्क स्थित पिंक कैफे में त्योहार : परम्परा भी, ट्रेंड भी शीर्षक से एक विशेष टॉक शो आयोजित किया।
इस कार्यक्रम में समाज, संस्कृति, साहित्य और मीडिया जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। मुख्य वक्ताओं में पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, आकाशवाणी की डायरेक्टर रेशमा खान, वरिष्ठ पत्रकार मणिमाला शर्मा, मीडिया सेलिब्रिटी वर्तिका जैन, समाजसेवी रिजवान एजाजी, प्रो. डॉ. शालिनी माथुर, समाजसेवी हीरालाल सैनी, लेखिका आसमा नाज, एंकर मीना जैन, लेखिका तरावती सैनी, डॉ. रत्ना शर्मा, समाजसेवी मंजू गुप्ता और डॉ. राजीव शर्मा शामिल रहे।

इस कार्यक्रम में समाज, संस्कृति, साहित्य और मीडिया जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया।
फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक शिल्पी अग्रवाल ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य त्योहारों की परंपरा और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन पर विमर्श करना था, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे और साथ ही नए ट्रेंड्स को भी आत्मसात कर सके।

वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए परंपराओं की महत्ता और आधुनिक समय में उनके नए रूप पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए परंपराओं की महत्ता और आधुनिक समय में उनके नए रूप पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार मणिमाला शर्मा ने कहा कि रीति-रिवाज तभी जीवित रहते हैं जब हम उन्हें स्वयं अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं। पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल ने बताया कि हमारे परिवार ने ढाई सौ वर्षों से परंपराओं को निभाया है और आज भी त्योहार पूरे रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं।

आकाशवाणी डायरेक्टर रेशमा खान ने कहा कि त्योहारों की खूबसूरती धर्म से नहीं बल्कि उन्हें मनाने के अंदाज से झलकती है।
आकाशवाणी डायरेक्टर रेशमा खान ने कहा कि त्योहारों की खूबसूरती धर्म से नहीं बल्कि उन्हें मनाने के अंदाज से झलकती है। मीडिया सेलिब्रिटी वर्तिका जैन के अनुसार बुज़ुर्गों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यदि हम नई पीढ़ी को साथ रखें, तो यही परंपरा भी है और आज का ट्रेंड भी।

मीडिया सेलिब्रिटी वर्तिका जैन के अनुसार बुज़ुर्गों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यदि हम नई पीढ़ी को साथ रखें, तो यही परंपरा भी है और आज का ट्रेंड भी।
डॉ. रत्ना शर्मा ने कहा कि नई पीढ़ी अपने अंदाज और ट्रेंड्स के अनुसार त्योहार मना रही है, और यही शैली उन्हें परंपराओं से जोड़ती है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संदेश के साथ हुआ कि परंपरा और आधुनिकता का संगम ही हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रख सकता है।
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