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सरकारी स्कूलों के ही नहीं, राजधानी में कॉलेजों के भवनों के भी बुरे हाल हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों का भास्कर ने दौरा किया तो सामने आया कि महाराजा कॉलेज, विधि महाविद्यालय सहित कई अन्य कॉलेजों के भवन जर्जर हालात में है। आजादी से पहले 8
घोषणा कर भूली सरकार
पिछले तीन साल में दो सरकार ने बजट की घोषणा की, लेकिन भूल गई। गहलोत सरकार ने पहले 50 करोड़ फिर 6 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। भाजपा सरकार ने आने के बाद दो करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। मजे की बात ये है कि दोनों ही सरकारों ने तीन साल में मेंटेनेंस के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया। ऐसे में आरयू कैंपस व संघटक महाराजा, महारानी, कॉमर्स, राजस्थान और लॉ कॉलेज के भवन वेंटिलेटर पर है।
“भवन, मेंटेनेंस, बजट और रिक्त पदों के बारे में हमारे संपदा अधिकारी-यूई से बात करो। उनके पास रिकाॅर्ड है।” -राजकुमार कस्वां, रजिस्ट्रार, आरयू
“मुख्य भवन की छतों, लाइब्रेरी और अन्य भवनों के मेंटेनेंस के लिए हमने विश्वविद्यालय को दो करोड़ रुपए जमा करा रखे हैं।” – डॉ. जी.पी.सिंह, प्राचार्य, महाराजा कॉलेज
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