सिरोही के पूर्व विधायक लोढ़ा ने सुमेरपुर के पूर्व प्रधान हरिशंकर मेवाड़ा के साथ सई बांध का दौरा किया।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सई बांध से बेकार बहकर गुजरात जा रहे पानी को जवाई बांध में मोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताई है। रविवार को लोढ़ा ने सुमेरपुर के पूर्व प्रधान हरिशंकर मेवाड़ा के साथ सई बांध का दौरा किया और योजना क
लोढ़ा ने बताया कि वर्ष 2015 से 2020 के बीच सई बांध से लगभग 3000 एमसीएफटी पानी बेकार बहकर गुजरात चला गया था। इस नुकसान को रोकने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2020 में करीब 100 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत की थी। इस योजना के तहत सई बांध की पौने तीन मीटर गहरी सुरंग को 4 मीटर तक गहरा किया जाना था, ताकि बेकार जा रहे पानी को जवाई बांध में लाया जा सके। इसके पूरा होने पर जवाई बांध में पहुंचने वाले पानी की मात्रा 34 एमसीएफटी से बढ़कर 75 एमसीएफटी तक होनी थी।

लोढ़ा सरकार पर कार्य के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
उन्होंने खेद व्यक्त किया कि यह महत्वपूर्ण परियोजना 15 सितंबर 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब तक केवल 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। लोढ़ा ने कहा कि यदि कार्य समय पर होता, तो इस वर्ष जवाई और सई बांध में उपलब्ध भरपूर पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सकता था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह संभावना है कि कार्य 2026 से पहले पूरा नहीं होगा।
लोढ़ा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे प्रशासन और ठेकेदार को सक्रिय कर इस कार्य को गति प्रदान करें, ताकि क्षेत्र के लोगों को समय पर इस योजना का फायदा मिल सके। इस अवसर पर सहायक अभियंता (सिंचाई) आकांक्षा भी मौजूद थीं और उन्होंने कार्य की प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

पूर्व विधायक लोढ़ा ने सहायक अभियंता (सिंचाई) से ली कार्य प्रगति की जानकारी।
यह थी सई बांध की योजना उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में बना सई बांध जो कि जवाई बांध का फीडर बांध है। जिससे पेयजल व सिंचाई की आवश्यकताएं पूरी होती हैं। इस बांध की मूल लंबाई 951.20 मीटर व ऊंचाई 8.25 मीटर और सकल क्षमता 1106.58 एमसीएफटी थी। जिसे 2006-08 में बढ़ाकर ऊंचाई 10.93 मीटर व क्षमता 1618.47 एमसीएफटी कर दी गई। बांध का जलग्रहण क्षेत्र 331.52 वर्ग किमी है। यहां से हर वर्ष पानी जुलाई से जनवरी माह के बीच 6.776 किमी लंबी सुरंग के माध्यम से जवाई बांध तक पहुंचाया जाता है।
सुरंग की मौजूदा क्षमता 305 क्यूसेक है, जिसे बढ़ाकर 855 क्यूसेक करने के लिए राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर 2020 को 8658.30 लाख की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी। इस कार्य के 15 सितंबर 2024 तक पूर्ण होना था, लेकिन अभी तक 60 फीसदी कार्य ही हो सका हैं।
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