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बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में 27 साल पहले जमीनी विवाद में दो जनों की हत्या के मामले में नौ जनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे श्रीडूंगरगढ़ सरिता नौशाद की कोर्ट ने इस आशय के आदेश दिए हैं।
अपर लोक अभियोजक सोहननाथ सिद्ध ने बताया कि साल 2009 के हत्या के मामले में कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद तथ्यों व सबूतों के आधार पर नौ जनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। परिवादी सूडसर निवासी जगदीश पुत्र सुरजाराम के वकील एडवोकेट बाबूलाल दर्जी ने पूर मामले की पैरवी की। दर्जी ने बताया कि 25 मई 2009 की रात करीब एक बजे खेत की ढाणी में सोते हुए पर हमला कर मदनलाल और उसके मामा सुरजाराम जाट की हत्या कर दी। वहीं हत्या के आरोपी गोपालराम पुत्र सुगनाराम, नंदराम पुत्र लिखमाराम, लाछीदेवी पत्नी लिखमाराम, भगवानाराम पुत्र लिखमाराम, रामप्रताप पुत्र गोपालराम, गोमती पत्नी गोपालराम, हुक्माराम पुत्र गोपालराम, निवासी सूडसर तथा श्रीराम व हीराराम पुत्र सुगनाराम को सजा सुनाई गई है।
पूरा परिवार जेल में
ये पूर मामला एक परिवार के जमीन का विवाद से जुड़ा था। परिवादी जगदीश जाट के पिता सुरजाराम व मघाराम, परिवादी की मां व छोटी बहन सभी ढाणी में सो रहे थे। तभी परिवादी के ताऊ गोपालराम व उसके लड़के रामप्रताप, हुक्मचंद, तथा भगवानाराम व नंदराम पुत्र लिखमाराम, लिखमाराम की पत्नी, श्रीराम पुत्र सुगनाराम व दो तीन अन्य ढाणी में घुसे और लाठी व सरियों से मारपीट की। जिससे घायल सुरजाराम की बीकानेर ले जाने के दौरान व कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान मघाराम की भी मौत हो गई व परिवादी सहित अन्य भी घायल हुए। रात को नींद में जान से मारने और अन्य को मारने के प्रयास में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच, गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए परिवार की ही दो महिलाओं, उनके बेटों सहित सभी 9 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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