धर्मसभा में प्रवचन देते आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ।
आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में सर्व संपन्नता विवेक और विनय गुण से प्राप्त होती है। गुरु, शिक्षक माता- पिता ,परिजनों का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते है। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक
वर्तमान ठीक तो भविष्य भी ठीक होगा
शुक्रवार को जैन नसिया में आचार्य जी कहा कि विवेक से हम अतीत और भविष्य को समझ सकते हैं। वर्तमान ठीक करेंगे तो भविष्य भी हमारा ठीक होगा। विवेक से ज्ञान मिलता है, विवेक और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है और ज्ञान हमें स्वाध्याय से मिलता है। कर्मों के अनुसार पुण्य या पाप अनुसार प्राप्त होती है।
भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक का जीवन हमारे समक्ष है कि वे कैसे महापुरुष भगवान बने हैं । आचार्य श्री ने कहा कि भगवान महावीर सिंह की पर्याय में होने के बावजूद पुण्य से महावीर स्वामी बने हैं। खान-पान अशुद्ध है, विवेक हीनता से कार्य कर रहे हैं तो उससे स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहेगा । बीमार होंगे , स्वस्थ रहने पर ही बुद्धि विवेक और ज्ञान होता है । जीवन का कोई भरोसा नहीं होता है । गत दिनों सभी ने श्री विशाल सागर जी की मुनि दीक्षा देखी और कुछ ही समय बाद उनकी समाधि भी हो गई।

आचार्य जी की धर्मसभा में आरती उतारती महिलाएं ।
बोले- जिनवाणी हमारी माता
राजेश पचोरिया ने बताया कि आचार्य जी के अनुसार जिनवाणी हमारी माता है क्योंकि माता के समान वह भी हमारे जीवन का निर्माण संस्कार रूपी धर्म से करती हैं ।
इससे पहले आर्यिका श्री दिव्याश मति माता जी ने प्रवचन में वाणी के उपयोग के प्रकार और उनके वाणी के गुण बताये। उन्होंने कहा कि गुरु की संगति से गुणों की प्राप्ति होती है और मानव जीवन की सार्थकता गुण संपदा से होती है। व्यक्ति को वाणी और व्यवहार के कारण ही हर किसी के हृदय में जगह स्थान मिलता है। वाणी शक्तिशाली होती है। अनेक उदाहरणों से बताया कि वाणी असमय, अधिक, असत्य ,अप्रिय और अहितकारी नहीं बोलना चाहिए, मीठे वचन से सुख मिलता है। मीठे वचन ही वशीकरण मंत्र है । इससे जीवन उन्नत और श्रेष्ठ बनता है। जीभ की चोट ठीक हो सकती हैं किंतु जीभ के कारण बोली वाणी का धाव (चोट) ठीक नहीं होती।
मुनिराज का करेंगे पूजन
समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार श्री जी और पूर्वाचार्यों के चित्रों समक्ष दीप प्रज्वलन स्थानीय कमेटी के भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, धर्मेंद्र पासरोटिया, कमल सर्राफ, वीरेंद्र संघी, पारस उम, अंकुर पाटनी, राजेश बोरदा, मुकेश बरवास द्वारा कर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन , जिनवाणी भेट की।
आगामी दिवस पूर्णिमा रक्षाबंधन पर्व पर सुबह अभिषेक शांति धारा के बाद आचार्य संघ सानिध्य में 1008 श्री श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू और विष्णु कुमार महा मुनिराज सहित 700 मुनिराज का पूजन की जाएगी । वहीं 15 अगस्त को दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक अध्यापकों की शांति समागम शताब्दी समारोह पर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी ।
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