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राधा रानी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था ऐसी है कि बस्ती के 7 परिवार बंद गेट से ही 25 साल से पूजा कर रहे हैं। लगातार पूजा से गेट पर धूप-दीप-अगरबत्ती के धुएं के निशान गेट पर प्रशासनिक बेपरवाही की गवाही दे रहे हैं। मंदिर के पास में रहने वाली कृष्णा (50)
जिम्मेदारी का अंत; 2024 में प्रशासन ने ताला खोलने की बजाय मंदिर को ही सील कर दिया
गलता गद्दी विवाद के चलते हाई कोर्ट ने गलताजी व इसके अधीन सभी मंदिरों के लिए जिला कलेक्टर काे प्रशासक नियुक्त किया था। इसके बाद 23 अक्टूबर 2024 काे माणक चौक तातादरी स्थित राम गोविंद जी मंदिर के ताला खोलने के बजाय प्रशासन उसे सील कर नोटिस चस्पां कर गया। बता दें कि गलता पीठ के 9वें आचार्य श्रीचार्या महाराज ने 280 साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी। कृष्ण व राम भक्तों में आपसी भक्ति प्रेम बना रहे इसलिए इसका नाम राम-गोविंद मंदिर रखा।
यहां पाषाण की श्रीकृष्ण की प्रतिमा व अष्टधातु का राधाजी का विग्रह स्थापित करवाया था। 25 साल पहले दरवाजा खोलते समय भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति खंडित हाे गई थी, इसके बाद गलता पीठ के आचार्य ने नई मूर्ति भी बनवाई थी, लेकिन पहले जैसा स्वरूप नहीं होने से विराजमान नहीं की जा सकी। दूसरी बार जब मूर्ति तैयार हाे रही थी ताे मूर्तिकार से खंडित हाे गई। इसके बाद से राधा जी अकेली ही विराजमान हैं।
रौद्र रूप में दिख रही यह प्रतिमा माता दुर्गा या चंडी की नहीं, बल्कि सौम्य राधा की है
श्रीकृष्ण की राधा की। 25 साल से राधा द्वापर-सरीखे चिर-विरह में लीन हैं। माणक चौक थाने के पीछे तातादरी स्थित राम-गोविंद मंदिर में विराजे श्रीकृष्ण की प्रतिमा वर्ष 2000 में खंडित हुई तो राधा रानी काे ताले में कैद कर दिया गया। एक साल से जिला प्रशासन यहां प्रशासक है मगर राधा की अनदेखी बदस्तूर जारी है। राधा का शृंगार तो दूर की बात, इनकी पूजा तक नहीं हो रही है।
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