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बाड़मेर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था बदहाल है। 1 जुलाई के साथ ही नया सत्र शुरू हो गया, लेकिन स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से बच्चों का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। सरकारी स्कूलों पर तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार हो रह
बाड़मेर जिले में ऐसे कई स्कूल है, जिसमें जितने स्वीकृत पद है उसके मुकाबले 20-30 फीसदी ही पदों पर शिक्षक है। कई तो ऐसे स्कूल भी जहां 4 साल बाद सरकार ने व्याख्याताओं के पद भी सृजित नहीं किए है। ऐसे में लेवल-1 और लेवल-2 के शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बाड़मेर जिले में 712 सीनियर सैकंडरी स्कूल है, जिसमें 11612 पद स्वीकृत है, लेकिन 6287 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत है, जबकि 5325 पद खाली पड़े हैं।
मायलों का डेर 12वीं स्कूल सिर्फ 1 प्रिसिंपल
बाड़मेर पंचायत समिति के राउमावि. मायलों का डेर 2021 में 10वीं और 2022 में 12वीं में क्रमोन्नत हुई थी, लेकिन शिक्षक, व्याख्याताओं के पद ही सृजित नहीं किए गए हैं। 2023-24 में जब 12वीं जब पहली बार 9वीं से क्लास लगी तो 230 बच्चों का नामांकन था, लेकिन अब हाल ये है कि सिर्फ 80 बच्चे ही है। 12वीं स्कूल होने के बावजूद सिर्फ एक प्रिसिंपल ही कार्यरत है। 12 कक्षाओं के बच्चे एक प्रिसिंपल के भरोसे है। यहां 2 साल में 150 से ज्यादा बच्चे टीसी लेकर दूसरी स्कूलों में एडमिशन ले चुके है।
सगराणियों की ढाणी, 4 कमरे व 3 शिक्षक
गुड़ामालानी विधानसभा में राउमावि. सगराणियों की ढाणी स्कूल है, जहां सिर्फ 4 कमरे ही है। इनमें 3 में क्लास लगती है, बाकी बच्चों को टीन शेड के नीचे सामूहिक रूप से ही बिठा कर पढ़ाना पड़ रहा है। यहां सिर्फ 3 शिक्षक है। लेवल-1, लेवल-2 और सेकंड ग्रेड का एक-एक शिक्षक है। जबकि यहां 13 पद स्वीकृत है। फर्स्ट ग्रेड के पद भी स्वीकृत नहीं है। 2021 में स्कूल क्रमोन्नत हुआ था। इस बार शिक्षकों की कमी की वजह से 25 बच्चों ने टीसी कटवा कर दूसरी स्कूलों में दाखिला करवा दिया।
राउमावि. बारूड़ी, में 17 पद, कार्यरत सिर्फ 5
गुड़ामालानी पंचायत समिति के जालोर सीमा पर राउमावि. बारूड़ी स्कूल है। जहां शिक्षक और व्याख्याताओं के 17 पद सृजित है, लेकिन सिर्फ 5 ही कार्यरत है। यहां 2023 में 250 बच्चों का नामांकन था, अब शिक्षक नहीं होने से इस बार 134 बच्चों का नामांकन रह गया है। यहां प्रिसिंपल, पीटीआई, हिंदी सेकंड ग्रेड, लेवल-1 का ही शिक्षक है। भास्कर टीम जब स्कूल पहुंची तो बच्चे प्रार्थना की तैयारी में थे। यहां भी सामूहिक रूप से क्लास लगाना मजबूरी है। लंबे समय से शिक्षकों की कमी है।
सादुलानियों का तला, पद ही स्वीकृत नहीं
बाड़मेर पंचायत समिति के अधीन राउमावि. सादुलानियों का तला स्कूल है। यह स्कूल 2021 में 8वीं से 10वीं और 2022 में 10वीं से 12वीं में क्रमोन्नत हुआ है, लेकिन 4 साल से यहां 12वीं तक क्लास लग रही है, लेकिन स्कूल में व्याख्याताओं के पद ही सृजित नहीं हुए है। ऐसे में अब तक 12वीं स्कूल में सिर्फ 5 पद ही स्वीकृत है, जबकि 17 से ज्यादा पदों की आवश्यकता रहती है। यहां करीब 250 बच्चों का नामांकन होने के बाद भी शिक्षकों की कमी से बच्चों का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश की 283 स्कूलों को क्रमोन्नत कर पद सृजित करना भूली सरकार
2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने प्रदेश की 283 स्कूलें 10वीं से 12वीं में क्रमोन्नत कर दी, लेकिन इन स्कूलों में आज दिन तक सरकार नए शिक्षकों और व्याख्याताओं के पद सृजित करना ही भूल गई है। 4 साल से फर्स्ट ग्रेड और व्याख्याता ही नहीं है। ये हाल सिर्फ बाड़मेर में ही नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान में ऐसा चल रहा है।
शिक्षकों की कमी फिर भी 828 शिक्षकों का जिले से बाहर ट्रांसफर
बाड़मेर-बालोतरा जिले में प्राइमरी व सी.सै. की 17107 सरकारी स्कूलें हैं। इनमें 45 फीसदी शिक्षकों के पद खाली है। पहले से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे बाड़मेर के हिंदी माध्यम स्कूलों कार्यरत 857 शिक्षकों का अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में चयन किया गया है। इनमें 84 शिक्षक तो जिले की अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में ट्रांसफर हुए, जबकि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में चयनित 828 शिक्षक बाड़मेर जिले से बाहर अपने जिले या नजदीक जिलों में चले गए। एक साथ 828 शिक्षकों का जिले से बाहर ट्रांसफर होने से हिंदी माध्यम स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था लड़खड़ा गई है।
“बाड़मेर जिले में जहां-जहां शिक्षकों की कमी है, वहां शिक्षकों को लगाया जा रहा है। हाल ही में जिले की स्कूलों में शिक्षकों का अंग्रेजी माध्यम स्कूल के लिए चयन किया गया। इसमें 857 शिक्षकों के ट्रांसफर हुए है। इनमें 828 शिक्षकों का तो जिले से बाहर दूसरो जिलों की अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में ट्रांसफर हुआ है। जहां कमी है वहां शिक्षक लगा रहे है।”
-देवाराम चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी (मा.)
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