पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सीकर में नकली दवा पीने से एक बच्चे की मौत पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रदेश में खांसी की सिरप पीने से हुई बच्चे की मौत और अन्य जगहों पर लोगों की तबीयत बिगड़ने के मामले में सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने मामले में न्यायिक जांच की मांग करते हुए पुरजोर तरीके से मुद्दा उठाया हैं। खाचरियावास ने
खाचरियावास जयपुर में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान सीकर में नकली दवा पीने से एक बच्चे की मौत पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लंबे समय से पूरे राजस्थान में नकली दवा खरीद के बड़े घोटाले की आशंका जताई है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मामले को दबाने की कोशिश की तो वे सड़कों पर उतरकर जवाब देंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की ओर से दी जा रही मुफ्त दवाएं लोगों की मौत का कारण बन रही हैं और उन्हें बीमार कर रही हैं।
नकली दवा खरीद के लिए कौन जिम्मेदार है- खाचरियावास
उन्होंने सरकार से यह बताने की मांग की है, कि मुफ्त दवा योजना के तहत कितनी दवाएं ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से खरीदी गई हैं और नकली दवा खरीद के लिए कौन जिम्मेदार है।
कितनी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाएं खरीदी गई ?
पूर्व मंत्री ने इस घोटाले की न्यायिक जांच कराने की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि इससे पता चलेगा कि अब तक नकली दवा पीने से कितने लोगों की मौत हुई है और कितनी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाएं खरीदी गई हैं।
राज्य सरकार ने नकली दवा खरीदने की बात स्वीकार की- खाचरियावास
खाचरियावास ने बताया कि राज्य सरकार ने नकली दवा खरीदने की बात स्वीकार की है और तुरंत इसकी बिक्री बंद कर दी है। उन्होंने सरकार से इस मामले को दबाने के बजाय पूरी जांच कराने का आग्रह किया, अन्यथा नकली दवा खरीद घोटाले में भाजपा सरकार भी नहीं बच पाएगी।
मामले को दबाने पर सड़कों पर करेंगे आंदोलन- खाचरियावास
उन्होंने याद दिलाया कि मुफ्त दवा और मुफ्त इलाज कांग्रेस सरकार का एक ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिससे लोगों को बहुत लाभ मिला था और वे इस पर भरोसा करते थे। खाचरियावास ने कहा कि भाजपा सरकार इस भरोसे को तोड़ रही है और मुफ्त दवा के नाम पर जहर नहीं बांट सकती।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण पर जवाब देने और प्रभावित बच्चे के परिवार व बीमार लोगों की मदद के लिए आगे आने की मांग की।

यही है वो सिरप, जिसे पीने के बाद लगातार बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं।
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खांसी की दवा पीने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले थम नहीं रहे हैं। सीकर में पांच साल के बच्चे की मौत हो गई। दावा किया जा रहा है सिरप पीने के बाद ही बच्चे की सांसें थम गईं। इसके अलावा सीकर के श्रीमाधाेपुर और भरतपुर के अलावा जयपुर में भी एक केस सामने आया है। सिरप पीने के बाद दो साल की बच्ची को जयपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराना पड़ा।
खास बात यह है कि जिस सिरप (dextromethorphan hydrobromide syrup) से तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं, उसकी इसी साल जून में जांच के बाद सप्लाई शुरू हुई थी। जिस कंपनी की ये सिरप है। उसकी एक दवा पहले भी ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड’ पाई गई थी। इधर, लगातार मामलों के बाद आरएमएससीएल ने दवा की वितरण पर रोक लगा दी है। ड्रग डिपार्टमेंट ने दवाओं के सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है।(पूरी खबर पढ़े)
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