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अलवर के मालाखेड़ा तहसील में कार्यरत कानूनगो पवन शर्मा (46) की रविवार शाम रात करीब 8 बजे घर पर हार्टअटैक से मौत हो गई। मृतक की पत्नी जीएसटी में एसटीओ हेमा शर्मा का आरोप है कि तहसीलदार मेघा मीणा के नोटिसों से परेशान थे। तहसीलदार ने 20 जून को पवन व पटवा
कराया। जबकि पति पहले ही इस बारे में बता चुके हैं।
वहीं पटवारी नारायण ने कहा कि 11 व 12 जून को तहसीलदार को लिखित में जवाब दिया था कि इस जमीन पर कोई स्टे नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें नोटिस जारी किया। यह नोटिस उन्हें दिया भी नहीं बल्कि सीधे ही कलेक्ट्रेट भिजवा दिया। फिर 2 जुलाई को पुनः एक नोटिस जारी हुआ, जिसमें लिखा था कि कानूनगो व पटवारी ने कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसका उन्हें 31 जुलाई को कलेक्ट्रेट शाखा से पता लगा। इससे पहले हेमा ने बताया कि पति की शाम को अचानक तबीयत खराब हुई। उन्हें सोलंकी अस्पताल ले गए, वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
तहसीलदार को चार्जशीट की सिफारिश हो चुकी
तहसीलदार मेघा मीणा भ्रष्टाचार सहित क गड़बड़ियों के आरोप के बाद कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने इनके खिलाफ 16 सीसी की चार्जशीट के लिए रेवन्यू बोर्ड में सिफारिश की है। वहीं स्थानीय कानूनगो, पटवारी, डीडराइडर्स आदि तहसीलदार क कार्यशैली के विरोध में उनके निलंबन की मांग को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। पवन खुद धरने में शामिल रहते हैं। मृतक का बेटा 11वीं व बेटी दिल्ली में कॉलेज में पढ़ती है
अभी तक इन पर गिरी है गाजः
तहसीलदार मेघा पर चल रहे आरोपों के चलते कलेक्टर ने 1 अगस्त को अतिरिक्त प्रोग्रामर सतीश मीणा को हटाकर गोविंदगढ़ लगा दिया था। तहसीलदार के नदजीकी होने के कारण इनसे बाबू का काम लिया जा रहा था। वहीं 2 अगस्त को डीएलएम की बैठक में दो पाते हुए माधोगढ़ पटवारी सुमन मीणा को निलंबित कर मुख्यालय टहला करने के आदेश हुए हैं। अब तहसीलदार के निलंबन पर अड़े थे।
वहीं तहसीलदार का कहना है कि हमने पवन को किसी तरह का नोटिस नहीं दिए। मुझ पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। हमें उनकी मौत के जिम्मेदार नहीं हैं।
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