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चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर कस्बे में एक बार फिर लेपर्ड की दहशत बढ़ गई है। पिछले सात दिनों में कई बार लोगों ने इसे कालिका माता मंदिर की पहाड़ी पर घूमते हुए देखा है। यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और रोजाना बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए वहां जाते हैं। ल

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लोग घरों से बना रहे है वीडियो।

लोग घरों से बना रहे है वीडियो।

दिन में भी दिख रहा तेंदुआ, लोग छतों से बना रहे वीडियो

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ अब दिन में भी पहाड़ी क्षेत्र में खुलेआम घूमता नजर आ रहा है। डर के चलते लोग बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेज रहे हैं। कई लोगों ने लेपर्ड को अपने घर की छत या खिड़की से घूमते हुए देखा और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा भी किया है।

घर से कुत्ता उठा ले गया था लेपर्ड, गाय को भी किया घायल

चारभुजा मोहल्ला निवासी मुकेश जोशी ने बताया कि उनका घर आखिरी पहाड़ी के पास है। कुछ दिनों पहले लेपर्ड एक घर में घुस आया और वहां बंधे कुत्ते को उठा ले गया। बाद में उसका शिकार कर लिया। इस घटना से मोहल्ले में काफी दहशत फैल गई। इसके बाद लेपर्ड ने एक गाय पर भी हमला किया और उसे घायल कर दिया।

मुकेश जोशी ने बताया, “मैंने अपने घर से लेपर्ड का वीडियो बनाया, जो पहाड़ी पर साफ दिख रहा था। यह लगातार कई दिनों से आसपास घूम रहा है। लेकिन वन विभाग की टीम अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। पिंजरा तक नहीं लगाया गया है। अगर कोई बड़ी जनहानि हो गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?”

लोगों ने जताई चिंता, लेपर्ड को पकड़ने की मांग हुई तेज

गांव के अन्य लोगों ने भी यही चिंता जताई है। उनका कहना है कि लेपर्ड कभी भी किसी पर हमला कर सकता है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। लोग मंदिर जाना भी कम कर रहे हैं।

गांव के लोगों और आसपास के मोहल्लों के निवासियों ने वन विभाग से तुरंत पिंजरा लगाने और लेपर्ड को पकड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि अब ये खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है और यदि जल्दी कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़ी घटना हो सकती है।

जंगल सिमटा, इंसानों की बस्ती बढ़ी – बढ़ा संघर्ष

लेपर्ड के बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों में आने के पीछे एक और गंभीर कारण भी सामने आया है। अब लोग तेजी से पहाड़ियों की ओर मकान बनाते जा रहे हैं। कई ग्रामीणों ने पहाड़ी के आखिरी छोर तक घर बना लिए हैं, जिससे तेंदुए जैसे जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास लगातार घट रहा है।

पहले यह इलाका शांत और घना जंगल था, लेकिन अब वहां इंसानी गतिविधियों और निर्माण कार्यों में तेजी आ गई है। इसके अलावा, लेपर्ड के विचरण वाले इलाके में अब खनन (माइंस) भी शुरू हो चुकी हैं। इस कारण वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और शांत स्थान बहुत सीमित हो गए हैं।

भोजन और ठिकाने की तलाश में कस्बे की ओर आ रहे वन्यजीव

जंगल और सुरक्षित स्थानों की कमी के कारण अब लेपर्ड जैसे जानवर भोजन और आश्रय की तलाश में कस्बे की ओर आने लगे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से लेपर्ड भदेसर के आसपास लगातार देखा जा रहा है और अब ये इंसानों के घरों तक पहुंच गए हैं।



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