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हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद न्यायिक कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश का फैसला वापस ले लिया हैं। जिसके बाद पिछले 10 दिनों से चल रही न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई हैं।
मंगलवार से प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में कर्मचारी काम पर लौटेंगे। दरअसल प्रदेश के न्यायिक कर्मचारी कैडर पुर्नगठन की मांग को लेकर 18 जुलाई से सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। लेकिन 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध करार दिया था।
वहीं आज हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर हड़ताल खत्म नहीं होती है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट और सरकार ने दिया आश्वासन राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र नारायण जोशी ने बताया कि आज हमारी विधि मंत्री जोगाराम पटेल और हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एसपी शर्मा से वार्ता हुई। वार्ता में सरकार और हाईकोर्ट ने हमारी मांगे मानने का हमें ठोस आश्वासन दिया हैं।
उन्होने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। हाईकोर्ट ने सामूहिक अवकाश को लेकर ज्यूडिशियल ऑर्डर भी जारी कर रखा हैं। जिसका भी हमें सम्मान करना हैं। ऐसे में हमने सामूहिक अवकाश से लौटने का निर्णय लिया हैं।
दो साल से लंबित है मांग राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के संरक्षक बद्रीलाल चौधरी ने बताया कि पिछले दो साल से कर्मचारियों की यह मांग लंबित है। इस बाबत हाईकोर्ट की फुल बैंच ने 6 मई 2023 को प्रस्ताव पास करके राज्य सरकार को भिजवा दिया था। लेकिन सरकार ने दो साल बाद भी इसे लागू नहीं किया।
कर्मचारियों का कहना है कि इससे हमें प्रमोशन के कम मौके मिल रहे हैं और आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। जबकि राज्य कर्मचारियों में इन दोनों संवर्गों का पुनर्गठन तुरंत ही कर दिया गया था। लेकिन न्यायिक कर्मचारियों के साथ सरकार भेदभाव कर रही है।
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