‘ओपन स्कूल डे’ के तहत स्टूडेंट्स को अनुसंधान से जुड़ी शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान संस्थान (NIIRNCD) ने जोधपुर में ‘ओपन स्कूल डे’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों को वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्
यह आयोजन एक और कारण से भी खास था, क्योंकि यह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान के अग्रदूतों में से एक, प्रोफेसर वी. रामालिंगास्वामी की जयंती के अवसर पर मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नोडल संचार अधिकारी डॉ. रमेश कुमार हुडा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए आईसीएमआर की राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान में केंद्रीय भूमिका और जैव-चिकित्सा नवाचारों के सामाजिक मूल्य के बारे में बताया। डॉ. हुडा ने प्रोफेसर रामालिंगास्वामी के प्रेरणादायक जीवन और उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला।

‘ओपन स्कूल डे’ के तहत स्टूडेंट्स ने आईसीएमआर-नीरएनसीडी की विजिट की और वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों के बारे में जाना।
छात्रों ने देखी आईसीएमआर की उपलब्धियां
इस अवसर पर, आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल का एक विशेष संदेश भी साझा किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्कूली छात्रों को प्रयोगशालाओं में जाकर वैज्ञानिकों के काम को प्रत्यक्ष रूप से देखना चाहिए।
शैक्षणिक अनुभव के एक भाग के रूप में, छात्रों को आईसीएमआर के प्रमुख योगदानों पर आधारित कई शिक्षाप्रद फिल्में और डॉक्यूमेंट्री दिखाई गईं। इन फिल्मों में भारत की कोविड-19 परीक्षण व्यवस्था, स्वदेशी वैक्सीन ‘को-वैक्सीन’ का विकास, दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं की ड्रोन से आपूर्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन की पहल और टीबी उन्मूलन के प्रयासों को दर्शाया गया था। इसके अलावा, मच्छर जनित रोगों, खासकर एडीज एजिप्टी (टाइगर मच्छर), पर आधारित जन जागरूकता वीडियो भी दिखाए गए। इन प्रस्तुतियों ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।
अनुसंधान और नवाचार से रूबरू हुए छात्र
इसके बाद, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. मोहंती ने राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान संस्थान की प्रमुख अनुसंधान पहलों और उसकी अनुसंधान यात्रा की एक झलक प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कैसे संस्थान मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे असंचारी रोगों के क्षेत्र में फील्ड आधारित अनुसंधान, डेटा-संचालित हस्तक्षेप और अंतःविषय सहयोग के माध्यम से समाधान खोज रहा है। उनके सत्र ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि प्रयोगशालाओं में किए गए शोध कैसे नीतियों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बदल जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान, छात्रों को आईसीएमआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी कराया गया और लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी दिखाए गए। इस दौरान छात्रों ने वैज्ञानिक स्टाफ से सीधे बातचीत की और अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। ‘वैज्ञानिकों से मिलिए’ नामक एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र में, छात्रों को संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने कई सवाल पूछे।
प्रतिभागी स्टूडेंट्स को मिले सर्टिफिकेट्स
कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी छात्रों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र दिए गए और साथ आए शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस यादगार अनुभव को और भी खास बनाने के लिए, आईसीएमआर की ओर से छात्रों को एक विशेष रूप से डिज़ाइन की गई टोपी भी स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की गई। इस सफल आयोजन में डॉ. सुरेश यादव, डॉ. रमेश कुमार हुडा, डॉ. रमेश कुमार सांगवान और डॉ. जनेश कुमार गौतम सहित कई वैज्ञानिक उपस्थित थे।
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