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झालावाड़ का पिपलोदी गवर्नमेंट स्कूल 25 जुलाई को छत गिरने से उसमें दबने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के 13 दिन बाद एक बार फिर से बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे। हालांकि स्कूल का संचालन एक ग्रामीण के मकान में किया गया है।

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मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा ने बताया कि ग्रामीणों की सहमति से स्थानीय भवन को वैकल्पिक स्कूल के रूप में चुना गया है। इस भवन में रंग-रोगन, बिजली, पेयजल और शौचालय सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इससे बच्चों को एक सुरक्षित और सुलभ शिक्षण वातावरण मिल सकेगा।

जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि जो हादसा पीपलोदी गांव में 25 जुलाई को हुआ था। हमारे जो स्कूल के बालक थे और उनके जो परिजन थे, वो इस घटना से स्तब्ध थे। आज जब हमने उस स्कूल का संचालन शुरू किया। हमारा एक ऐसा दायित्व बन जाता है कि जो बच्चे जिनके मन-मस्तिष्क पर वो घटना बैठ चुकी है, उसको वो भूलें। जो घायल बच्चे थे उनकी अस्पताल में काउंसलिंग की। जो बाकि बच्चे थे गांव के, उनके घर जाकर टीचरों ने काउंसलिंग की। आज उसका परिणाम है कि सभी बच्चे खुशी-खुशी जो नया भवन है स्कूल का, उस भवन में आए। ये भवन गांव के किसी ग्रामीण का है। उस भवन को हमने नवीनीकृत करके आज बच्चों को हमने आमंत्रित किया है।

बच्चे बहुत खुश हैं जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि बच्चे बहुत खुश हैं। जिंदगी में बहुत सारी परेशानियां आती हैं। जो भी पिपलोदी गांव के बच्चे हैं, इस हादसे से उबर सकें। जिस तरीके से आज बच्चे स्कूल में मुस्कुराते हुए आए हैं ये हमारा सबसे बड़ा प्राश्चित है कि हम सभी बच्चों को खुशी-खुशी स्कूल लेकर आए। हम कोशिश करेंगे कि जैसा माहौल स्कूल में होता है, आने वाले 3-4 महीने में फिर से वह माहौल पिपलोदी गांव में हो। एक बार वहीं मुस्कुराहट पिपलोदी गांव के हर घर में मिले। ये प्रशासन का उत्तरदायित्व है।

स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों का होगा सम्मान कलेक्टर ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर पिपलोदी स्कूल के जो बच्चे हैं, उन बच्चों को हम लोग सम्मानित कर रहे हैं। इनमें से कुछ बच्चे वो हैं, जिन्होंने हादसे के समय दूसरे बच्चों की जान बचाई। दूसरे बच्चों को बाहर लेकर आए। वो बच्चे पूरे समाज के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। हमारा भी दायित्व बनता है कि ऐसे बच्चों को हमें सम्मानित करना चाहिए।

कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि हमारा प्रयास था कि बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार का व्यवधान न आए और वे भय से बाहर आकर दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाए और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई कमी न रहे।

स्कूल लौटे बच्चे, दिखी उत्साह आज जब स्कूल में पढ़ाई शुरू हुई, तो बच्चों ने शिक्षकों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिजनों ने भी बच्चों को आत्मविश्वास से स्कूल भेजा और जिला प्रशासन का आभार जताया कि उन्होंने इतने कम समय में न केवल शिक्षा की निरंतरता बहाल की, बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखा।

भविष्य की ओर एक सकारात्मक कदम पिपलोदी गांव में शिक्षा की यह नई शुरुआत एक सांत्वना और विश्वास की प्रतीक है। यह दर्शाता है कि एकजुटता, सहानुभूति और कर्तव्यपरायणता के साथ किसी भी संकट से उबरा जा सकता है।



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