☜ Click Here to Star Rating


जयपुर में आज तेज बारिश के बीच बूढ़ी तीज की सवारी निकाली गई। सवारी में कलाकारों की परफॉर्मेंस के बाद पचरंगा झंडा हाथ में लिए गामा पहलवान हाथी पर सवार होकर निकले। इनके पीछे बैलों से बंधी तोपगाड़ी और ऊंट पर हथियारबंद सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।

.

दरअसल, बूढ़ी तीज की सवारी सादगी और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। बूढ़ी तीज का विशेष महत्व विवाहित महिलाओं के लिए होता है, जो अपने सुहाग की लंबी उम्र और सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। पूरे दिन शहर की गलियों में पारंपरिक गीतों की गूंज रहेगी, महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजकर मंदिरों में पूजा अर्चना की। इससे पहले रविवार को तीज माता की सवारी निकाली गई थी।

मुंह से आग उगलते कलाकार भी बूढ़ी तीज माता की सवारी में शामिल हुए।

मुंह से आग उगलते कलाकार भी बूढ़ी तीज माता की सवारी में शामिल हुए।

राजस्थानी संस्कृति की रही अद्भुत झलक

इस दो दिवसीय आयोजन में राजस्थानी लोक जीवन, रीति-रिवाज और कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कालबेलिया, घूमर, कच्छी घोड़ी, शहनाई-नगाड़ा जैसे पारंपरिक आयोजन न सिर्फ देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने, बल्कि शहरवासियों ने भी इनसे अपने सांस्कृतिक जुड़ाव को महसूस किया।

राजस्थानी परिधान में सजी महिलाएं घूमर करते हुए सवारी में शामिल हुईं।

राजस्थानी परिधान में सजी महिलाएं घूमर करते हुए सवारी में शामिल हुईं।

तीज माता की सवारी में कालबेलिया नृत्य करती हुई महिलाएं भी शामिल हुईं।

तीज माता की सवारी में कालबेलिया नृत्य करती हुई महिलाएं भी शामिल हुईं।

प्लास्टिक से ढककर तीज माता की सवारी निकाली गई।

प्लास्टिक से ढककर तीज माता की सवारी निकाली गई।

कलाकार नाचते गाते तीज की सवारी में शामिल हुए। यहां कलाओं के अलग-अलग रंग देखने के लिए मिले।

कलाकार नाचते गाते तीज की सवारी में शामिल हुए। यहां कलाओं के अलग-अलग रंग देखने के लिए मिले।

भव्य प्रचार और लाइव प्रसारण ने बढ़ाया प्रभाव

इस बार तीज महोत्सव का प्रचार पर्यटन विभाग द्वारा बड़े स्तर पर किया गया। आयोजन का लाइव प्रसारण जयपुर शहर में जगह-जगह लगाई गई बड़ी स्क्रीन पर और राजस्थान के विभिन्न जिलों में डीओआईटी नेटवर्क के माध्यम से किया गया, जिससे हजारों लोग इस उत्सव से डिजिटल रूप से भी जुड़ सके।

जयपुर का यह तीज महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि यह राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक पहचान और विरासत का सार्वजनिक प्रदर्शन भी बना। राजघराने की उपस्थिति से लेकर आधुनिक प्रचार तकनीकों तक, यह आयोजन परंपरा और नवाचार का सफल संगम रहा।

विदेशी टूरिस्ट बारिश में भीगते हुए तीज माता की सवारी देखने पहुंचे।

विदेशी टूरिस्ट बारिश में भीगते हुए तीज माता की सवारी देखने पहुंचे।

कच्छी घोड़ी के साथ अलग-अलग कलाकर सड़क पर डांस करते हुए दिखे।

कच्छी घोड़ी के साथ अलग-अलग कलाकर सड़क पर डांस करते हुए दिखे।

सिर पर कलश लेकर तीज माता की सवारी मे शामिल हुए महिलाएं।

सिर पर कलश लेकर तीज माता की सवारी मे शामिल हुए महिलाएं।

बहरूपिये अलग-अलग स्वांग रचकर तीज माता की सवारी में शामिल हुए।

बहरूपिये अलग-अलग स्वांग रचकर तीज माता की सवारी में शामिल हुए।

कच्छी घोड़ी कलाकार तीज माता की सवारी में बारिश के बीच नाचते दिखे।

कच्छी घोड़ी कलाकार तीज माता की सवारी में बारिश के बीच नाचते दिखे।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading