जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार रात आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटों और चीख-पुकार से अस्पताल परिसर दहल उठा, लेकिन इसी खौफनाक मंजर में तीन ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की ज
आईसीयू से लोगों की चीखें सुनकर ये कुछ लोगों ने बिना कुछ सोचे-समझे आग की ओर दौड़ पड़े। अंदर दम घुटने वाला धुआं, लपटें और मौत का डर था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने कुछ मरीजों को बेड सहित तो कुछ को बेडशीट से बाहर निकाला। सांस लेने में दिक्कत होने के बावजूद वे पीछे नहीं हटे और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालते रहे।
हालांकि, इस हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई। रात करीब 11:20 बजे ट्रॉमा सेंटर में आग लगी, जिसके बाद परिजन मरीजों को लेकर भागने लगे। आईसीयू के बेड के साथ ही कुछ परिजन अपने मरीजों को लेकर हॉस्पिटल परिसर के बाहर सड़क पर आ गए।

इन तीनों ने लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन करके मरीजों को बाहर निकाला।
अब जानिए, हादसे में लोगों की जान बचाने वाले ने क्या कहा –
मरीजों को ला-लाकर पीछे लाल बिल्डिंग में शिफ्ट किया संतोष देवी ने बताया कि वह ट्रॉमा सेंटर के बाहर दुकान लगाती हैं। रात में लोगों को बाहर भागते हुए देखा। जब उन्होंने उनसे पूछा, तो उन्होंने बताया कि अंदर आग लगी है। संतोष देवी ने सोचा कि अगर आग लगी है, तो कुछ लोगों को बचाने में मदद करनी चाहिए। इसलिए, वह अंदर गईं और बेड सहित मरीजों को बाहर निकाला। मरीजों को ला-लाकर पीछे लाल बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया।

कॉन्स्टेबल वेदवीर धुएं से भरे माहौल में अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों को बाहर निकालने में जुटे रहे। बचाव कार्य के दौरान उन्हें खुद भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी
आग लगने के एक मिनट के अंदर पहुंची संतोष देवी ने बताया कि आगे की साइड से कोई फायर ब्रिगेड आए या फिर एम्बुलेंस आए, प्रशासन या कोई नेता आए, तो किसी को कोई दिक्कत न हो। वह आग लगने के एक मिनट के अंदर ही मौके पर पहुंच गई थीं। इसके थोड़ी देर बाद ही पुलिस वाले पहुंच गए थे। फायर ब्रिगेड करीब 15 मिनट में आ गई थी।

कॉन्स्टेबल हरिमोहन और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जिससे कई लोगों की जान बच सकी।
स्टोर में आग की लपटें काफी तेज थीं दमकल विभाग के कर्मचारी अवधेश पांडे ने बताया कि सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने तीन साइड पंप चलाए, जिससे आग बुझाने में मदद मिली। 4 से 5 मरीजों को अंदर से बाहर निकाला।
स्टोर में आग की लपटें काफी तेज थीं, जिसके कारण वहां तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। उस स्टोर में करीब 10 से 11 बेड थे। उन्होंने साइड वाली आईसीयू से भी सभी मरीजों को निकाल दिया, जिसमें पूरी टीम ने मदद की।
लोगों की चिल्लाने आवाज सुनकर दौड़ SMS थाने के कॉन्स्टेबल हरिमोहन ने बताया कि वे एसएमएस ट्रॉमा सेंटर में झगड़े के आरोपी का मेडिकल कराने आए थे। इसी दौरान उन्होंने दूसरी मंजिल से चिल्लाने की आवाज सुनी। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
उन्होंने अपने साथियों को भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद उनके साथ कॉन्स्टेबल वेदवीर और ललित भी मौके पर पहुंच गए। फायर विभाग के कर्मचारियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर धुएं को बाहर निकालने का प्रयास किया।

कॉन्स्टेबल हरिमोहन ने बताया कि उन्होंने दूसरी मंजिल से चिल्लाने की आवाज सुनी, जिसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे। बिना किसी देरी के बचाव कार्य शुरू कर दिया।
सांस लेने में तकलीफ होने लगी हरिमोहन ने बताया कि उनकी टीम ने मिलकर करीब 5 से 7 लोगों को बेडशीट से उठाकर बाहर निकाला। धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगी, साथ ही गले में खराश भी हो गई। हरिमोहन ने बताया कि वे, ललित और कॉन्स्टेबल वेदवीर भी इमरजेंसी में 3 घंटे भर्ती रहे। धुआं इतना भयंकर था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस की ड्रैगन लाइट की वजह से उन्हें दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे उन्हें लोगों को बचाने में मदद मिली।
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