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राजस्थान में पेपर लीक और डमी कैंडिडेट ही नहीं लंबे समय से ऑनलाइन एग्जाम में भी चीटिंग कराई जा रही थी। राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़े दो इंजीनियर दोस्तों ने यह खुलासा किया है।

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झुंझुनूं के जोगेंद्र और हरियाणा के परमजीत ने मिलकर जयपुर में 3-4 जगहों पर हाईटेक कंप्यूटर लैब खोल रखी थी। इनकी लैब पर SSC, बैंकिंग, रेलवे, राजस्थान पुलिस जैसे कई एग्जाम का सेंटर आता था।

दोनों मिलकर एग्जाम देने आए कैंडिडेट से लाखों रुपए में डील कर ऑनलाइन एग्जाम में चीटिंग करवाते थे। इसके लिए खुद की लैब में मौजूद कंप्यूटर को हैक कर लेते।

एग्जाम के दौरान खुद का एक्सपर्ट बुलाकर अभ्यर्थी की जगह पेपर सॉल्व करवाते थे। हर एग्जाम में चीटिंग की अलग-अलग कीमत फिक्स कर रखी थी।

SSC लेवल के एग्जाम में चीटिंग के लिए 8 लाख रुपए वसूलते थे। वहीं, अग्निवीर भर्ती, बैंक और रेलवे में प्रमोशन के एग्जाम में 2 से 3 लाख रुपए लेते थे।

प्रदेश के कई नामी कोचिंग सेंटर्स भी अपने कैंडिडेट को पास कराने के लिए ऑनलाइन एग्जाम में चीटिंग कराने वाली इस गिरोह के संपर्क में थे। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- खुद एग्जाम में फेल हुए दो दोस्तों ने कैसे ये चीटिंग गैंग बनाई….

दिल्ली में भंडाफोड़ हुआ तो जयपुर आए

ऑनलाइन एग्जाम में चीटिंग कराने वाला मास्टरमाइंड जोगिंदर सिंह पुत्र महेंद्र सिंह गांव लडुंदा (झुंझुनूं) का रहने वाला है। वहीं परमजीत पुत्र नेपाल सिंह कुबेर एनक्लेव कॉलोनी बहादुरगढ़ हरियाणा का रहने वाला है। इन्हें 2 अक्टूबर को राजस्थान एटीएस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है।

दोनों इलेक्ट्रिकल/कंप्यूटर इंजीनियर हैं। बी.टेक के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने दिल्ली गए थे। एक कोचिंग सेंटर में दोनों की मुलाकात हुई थी।

कई प्रयास के बाद एग्जाम पास नहीं कर पाए तो दोनों ने मिलकर 2018 में दिल्ली के तिमारपुर इलाके में एक कंप्यूटर लैब खोली। ऑनलाइन एग्जाम का ठेका लेने वाली कंपनियों से संपर्क कर अपनी लैब को किराए पर देना शुरू किया।

इसी दौरान मोटा पैसा लेकर कैंडिडेट को ऑनलाइन एग्जाम पास कराना शुरू किया।

ऐसे करवाते थे चीटिंग?

ऑनलाइन एग्जाम कराने की जिम्मेदारी जिन कंपनियों को दी जाती थी, वे तिमारपुर क्षेत्र में इनकी लैब से कॉन्ट्रैक्ट करती थी। एग्जाम से कुछ देर पहले ही लैब संचालक को कैंडिडेट की लिस्ट मिल जाती। जोगिंदर और परमजीत उन कैंडिडेट से संपर्क कर एग्जाम पास कराने के बदले मोटा पैसे की डील करते।

  • कंप्यूटर से इंजीनियरिंग होने के चलते ये कंप्यूटर हैक करने में माहिर थे। डील फिक्स होने के बाद ये लैब में उन कैंडिडेट के कंप्यूटर में रिमोट कनेक्टिविटी के टूल (AnyDesk/TeamViewer) इंस्टॉल कर देते।
  • इन टूल को एग्जाम के दौरान स्टार्ट कर उसका एक्सेस खुद ले लेते। फिर पूरा एग्जाम खुद चीटिंग के जरिए पास करवाते।
  • कोई टफ एग्जाम होता तो उसके लिए पैसा देकर खुद का एक्सपर्ट बुलवाते और ऑनलाइन एग्जाम सॉल्व करवाते थे।
  • कई बार मैन्युअल तरीके से भी पेपर पास करवाते। इसके लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर आए प्रश्नों फोटो खींच कर ले जाते। फिर उनके उत्तर लिखकर उसकी पर्ची बनाकर अभ्यर्थी को दे दी जाती।
जोगेंद्र और परमजीत ने कंप्यूटर लैब को हाइटेक बनाया हुआ था। ऑनलाइन एग्जाम कराने वाली कंपनियों से भी टाइअप कर रखा था। किसी न किसी एग्जाम का सेंटर वहां आ ही जाता था।

जोगेंद्र और परमजीत ने कंप्यूटर लैब को हाइटेक बनाया हुआ था। ऑनलाइन एग्जाम कराने वाली कंपनियों से भी टाइअप कर रखा था। किसी न किसी एग्जाम का सेंटर वहां आ ही जाता था।

दिल्ली में FIR के बाद जयपुर भागे

दिल्ली के तिमारपुर में दोनों शातिरों का ये मॉडल काम करने लगा था। धीरे-धीरे दिल्ली के द्वारका के कुछ केन्द्रों में भी इसी तरह से चीटिंग करवाने लगे।

साथी परमजीत के खिलाफ साल 2021 में तिमारपुर थाने में लैब हैकिंग का मामला दर्ज हुआ। दोनों शातिर दिल्ली पुलिस की रडार पर आ चुके थे। इसके बाद दिल्ली छोड़ 2021 में जयपुर पहुंचे थे।

जयपुर में कई जगह खोली लैब

जयपुर में दोनों ने एक एजुकेशन-सर्विस देने वाली कंपनी के प्रतिनिधि से मुलाकात की। वहां से पता चला कि जयपुर में ऑनलाइन एग्जाम कराने के लिए कोई बड़ी हाइटेक लैब नहीं है।

ऐसे में 2021 में अजमेर रोड 200 फीट बाईपास पर ‘रावत कॉलेज’ के नाम से लैब खोली। धीरे-धीरे गणपति कॉलेज, रीको कांटा चौराहा, मानसरोवर जैसे स्थानों पर नई लैब खोल दीं।

रीको कांटा चौराहे पर स्थापित लैब का महीने का किराया ही डेढ़ लाख रुपए महीने का है। शातिर हर नई जगह पर वही मॉडल अपनाते।

अपनी लैब को एग्जाम कराने के लिए बुक करवाते। अपने ही टीम को लैब में ऑब्जर्वर बनाकर वहां भेजते। टीम उन कंप्यूटर को हैक करती और फिर रिमोट एक्सेस के जरिए पेपर सॉल्व करवाना शुरू किया।

राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़े आरोपी परमजीत और जोगेंद्र (सफेद टी शर्ट में)।

राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़े आरोपी परमजीत और जोगेंद्र (सफेद टी शर्ट में)।

जयपुर के कई नामी कोचिंग सेंटर से डील

एटीएस की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि जोगेंद्र और परमजीत नकल के जरिए एग्जाम पास कराने के लिए डायरेक्ट कोचिंग संचालकों से भी डील करते थे।

इसके बाद इनकी कम्प्यूटर लैब में कौन-कौनसे कैंडिडेट का एग्जाम सेंटर आया है, उसकी डिटेल भेजी जाती थी। डील के अनुसार उन छात्रों के लिए कोचिंग के ही एक्सपर्ट पेपर सॉल्व कराने पहुंचते थे।

जांच में जयपुर के कई नामी कोचिंग सेंटर के नाम सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ कोचिंग संस्थानों के खाते में ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं।

ऐसे में आशंका है कि ऑनलाइन एग्जाम में चीटिंग का ये नेटवर्क बड़े लेवल पर काम कर रहा था और बड़ी संख्या में कैंडिडेट को एग्जाम पास करवाए गए।

गुरुग्राम के एक अपार्टमेंट से इन्हें पकड़ा गया है। आरोपी लंबे समय से पुलिस के रडार पर थे।

गुरुग्राम के एक अपार्टमेंट से इन्हें पकड़ा गया है। आरोपी लंबे समय से पुलिस के रडार पर थे।

SSC एग्जाम में नकल कराने की कीमत 8 लाख, कोस्ट गार्ड के 3 लाख

एटीएस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पकड़े जाने के डर से हर एग्जाम में केवल 5-6 स्टूडेंट्स से ही डील करते थे। हर एग्जाम की पोस्ट के अनुसार कीमत तय कर रखी थी।

SSC के एग्जाम में 8 लाख रुपए, कोस्ट गार्ड में 3 लाख और एयर फोर्स के एग्जाम में पेपर सॉल्व कराने के लिए 2 लाख रुपए लिए जाने की जानकारी एटीएस को मिली है।

जांच में यह भी पता चला है कि ये बैंकों में प्रमोशन के एग्जाम, रेलवे में RPF के प्रमोशन एग्जाम, राजस्थान पुलिस में एसआई के प्रमोशनल एग्जाम से लेकर अग्निवीर जैसे एग्जाम भी चीटिंग से पास करवाते थे।

जनवरी में गिरोह की पोल खुली, 9 महीने बाद पकड़े गए मास्टरमाइंड

इस रैकेट तक पहुंचने में एटीएस को 9 महीने लग गए। दरअसल, 5 जनवरी को राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड (एनएससी) में 186 पदों पर परीक्षा आयोजित हुई थी। देशभर में 60 केंद्रों पर तीन पालियों में 28,500 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे।

राजस्थान एसओजी ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें से 8 अभ्यर्थी थे जिन्होंने पैसे देकर डील की थी।

राजस्थान एसओजी ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें से 8 अभ्यर्थी थे जिन्होंने पैसे देकर डील की थी।

इस दौरान राजस्थान एसओजी-एटीएस को एग्जाम सेंटरों पर हैकिंग के जरिए सेंध लगाने की सूचना मिली। एटीएस ने जयपुर के छह संदिग्ध परीक्षा केंद्रों को चिह्नित किया। उन केंद्रों पर अपने पर्यवेक्षकों को तैनात किए।

इस दौरान पर्यवेक्षकों ने अजीब बात देखी: कुछ कंप्यूटर में अभ्यर्थियों ने लॉग इन कर रखा था। लेकिन वे उसमें कोई एक्टिविटी नहीं कर रहे थे। उसके बावजूद कर्सर अपने आप चल रहे थे।

एग्जाम में आने वाले प्रश्न भी अपने आप सॉल्व हो रहे थे। इसके वीडियो एविडेंस जुटाने के बाद एसओजी टीम ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

इनमें से 8 कैंडिडेट थे जो पैसा देकर चीटिंग कर रहे थे। इनसे पूछताछ में मास्टरमाइंड जोगेंद्र और परमजीत के नाम सामने आए थे। दोनों इस कार्रवाई के बाद से फरार थे। दोनों पर 25-25 हजार का इनाम रखा गया था।

इलेक्ट्रिशियन बनकर रेकी, फिर प्लंबर बनकर पहुंचे

हरियाणा का परमजीत शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता भी। वह पिछले कुछ समय से गुरुग्राम में अपनी गर्लफ्रेंड के सेक्टर-37 डी में सिग्नेचर ग्लोबल मिलेनिया-2 के फ्लैट में छिपकर रह रहा है।

2 अक्टूबर की सुबह दोनों आरोपी सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों में फ्लैट की ओर जाते हुए दिखे।

2 अक्टूबर की सुबह दोनों आरोपी सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों में फ्लैट की ओर जाते हुए दिखे।

चार दिन पहले एटीएस के दो जवान इलेक्ट्रीशियन बनकर उस सोसायटी में पहुंचे। फ्लैट की बिजली सप्लाई काट दी ताकि मरम्मत के बहाने उस फ्लैट तक पहुंचा जा सके।

वहां आरोपी नहीं मिला तो टीम वापस लौट आई, लेकिन इसी दौरान लिफ्ट में लगे कैमरे को हैक कर उसका एक्सेस ले लिया। जयपुर में बैठी एक टीम ने उन सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखनी शुरू की।

2 अक्टूबर को दोनों ही आरोपी जोगेंद्र और परमजीत लिफ्ट के सीसीटीवी कैमरे में ऊपर जाते हुए कैद हुए। वहां मौजूद टीम तुरंत एक्टिव हुई और कुछ देर बाद दो जवान फ्लैट में प्लंबर बनकर पहुंचे।

एक जवान ने फोन पर कोड वर्ड बोला- ‘टूल ले आओ।’ सिग्नल मिलते ही नीचे इंतजार कर रही पूरी टीम फ्लैट में दाखिल हुई। दोनों आरोपियों को दबोच लिया गया।

एटीएस के जवान जब फ्लैट में पहुंचे तो एक आरोपी की गर्लफ्रेंड ने फ्लैट का दरवाजा खोला था।

एटीएस के जवान जब फ्लैट में पहुंचे तो एक आरोपी की गर्लफ्रेंड ने फ्लैट का दरवाजा खोला था।



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