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जयपुर में बारिश के चलते 100 साल पुरानी 4 मंजिला जर्जर मकान ढह गया। सूचना पर पहुंची सिविल डिफेंस की टीम ने रेस्क्यू शुरू किया तो आंखें फटी रह गई। मलबे में पिता से लिपटी बेटी के शव पड़े थे। वहीं मलबे में दबे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। टीम ने एक प्लाई

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दरअसल, सुभाष चौक इलाके में पानों का दरिबा में शाहबुद्दीन (53) की चार मंजिला मकान है। मकान जर्जर हालत में है। मकान मालिक खुद अपने परिवार के साथ चार दरवाजा क्षेत्र में रहता है। जर्जर मकान को पिछले कई सालों से किराए पर दे रखा है। 15 कमरों में 6 परिवार के 19 मेंबर किराए पर रहते थे।

सबसे पहले देखिए हादसे की भयावह तस्वीरें…

एसडीआरएफ की टीम ने प्रभात का शव निकाला तो बेटी से लिपटा हुआ था। दोनों पत्थर के बड़े टुकड़े के नीचे दबे थे।

एसडीआरएफ की टीम ने प्रभात का शव निकाला तो बेटी से लिपटा हुआ था। दोनों पत्थर के बड़े टुकड़े के नीचे दबे थे।

प्रभात की बेटी पीहू का शव। एसडीआरएफ ने इसे मलबे से बाहर निकाला।

प्रभात की बेटी पीहू का शव। एसडीआरएफ ने इसे मलबे से बाहर निकाला।

अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा घटनाक्रम…

हादसे में बाप-बेटी की मौत मकान के मलबे में दबे 7 लोगों में प्रभात (33) और उसकी बेटी पीहू की मौत हो गई। दोनों के शव लिपटे हुए थे। इससे प्रतीत होता है कि हादसे के समय पिता ने बेटी को बचाने की कोशिश की थी। दो बच्चों सहित पांच घायलों का SMS हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। मौके पर जुटे लोगों ने बताया- रात को ऐसी आवाज आई, जैसे बादल फट गया। आवाज सुनकर घरों से बाहर आकर देखा तो मलबे में दबे लोग चिल्ला रहे थे।

SDRF कमांडेंट राजेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया- सबसे पहले मलबे को हटाकर प्रभात की पत्नी सुमित्रा को बाहर निकाला गया। यह परिवार पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के काशीपुर गांव के निवासी थे।

जब मकान ढहा तो सब नींद में थे शुक्रवार को हादसे के समय मकान में मौजूद प्रभात की रिश्तेदार नुमिता ने बताया- देर रात छह परिवार के मेंबर अपने-अपने कमरों में सो रहे थे। रुक-रुककर बारिश हो रही थी। बारिश होने के दौरान रात करीब 1 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी। आवाज के साथ ही नींद खुली।

दूसरी मंजिल पर मैं अपने कमरे के साथ ही नीचे ग्राउंड पर आकर गिरी। कुछ देर में खुद को संभालने पर परिवार के मेंबर भी मलबे में दबे दिखाई दिए।

लोगों ने बाहर निकाला, पुलिस ले गई हॉस्पिटल प्रत्यक्षदर्शी सप्तमी ने बताया- तेज धमाके की आवाज सुनकर आस-पास रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे। मलबे में दबे लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनकर मदद के लिए आगे बढ़े। मेरी बहन नुमिता चिल्ला रही थी, मुझे बाहर निकालो। मलबे में दबे मिले परिवार के कुछ मेंबर को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।

प्लाईवुड ने बचाई 4 जनों की जान SI ओमवीर ने बताया- मलबे से कुछ लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। रात के अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे-तैसे मलबा हटाते हुए आवाज सुनकर पहुंचने पर लोगों के दबे होने का पता चला।

एक प्लाईवुड के ऊपर मलबा गिरा हुआ था। इसके नीचे चार लोग दबे हुए थे। मलबे को हटाकर प्लाईवुड के नीचे मिले वासुदेव (34), उसकी पत्नी सुकन्या (23) और बेटे सोनू (4), ऋषि (6) की जान बच गई।

हादसे से जुड़ी अन्य तस्वीरें…

प्रभात की रिश्तेदार नुमिता परिवार के हालात बताते हुए रोने लगीं।

प्रभात की रिश्तेदार नुमिता परिवार के हालात बताते हुए रोने लगीं।

सप्तमी (ब्लैक ड्रेस) घर के दूसरे हिस्से में रहती थी, जो बच गया।

सप्तमी (ब्लैक ड्रेस) घर के दूसरे हिस्से में रहती थी, जो बच गया।

घर जल्दी लौटने से बची जान मकान में रणजीत सिंह ने भी किराए पर कमरा ले रखा है। इसमें वह ज्वेलरी का काम करता है। उसकी पत्नी सीमा (25) का कहना है- ढहने वाली मकान में उनके पति रणजीत सिंह काम करते हैं। पास ही दूसरे मकान में रहते हैं।

रात करीब 8 बजे कारीगरों के जल्दी जाने के कारण पति रणजीत भी घर आ गए थे। नहीं तो वह भी रात 1 बजे तक अपना काम समेटकर लौटते थे। जल्दी आ जाने के कारण उनकी जान बच गई। मकान मालिक को कई बार जर्जर मकान की मरम्मत को कहा था। हर बार बहाना बनाकर टाल देता था।

100 साल पुरानी इसी मकान का पीछे का हिस्सा गिर गया।

100 साल पुरानी इसी मकान का पीछे का हिस्सा गिर गया।

सिर ढकने की जगह तक नहीं नुमिता ने बताया- हादसे में परिवार के मेंबर्स की जान चली गई। रहने-खाने और पहनने का सामान भी मलबे में दबकर खत्म हो गया। दर्द से तड़पने और आंसुओं के अलावा हमारे पास कुछ नहीं है। रात 1 बजे से रोड पर ही खड़े हैं। जैसे-तैसे अपना परिवार चला रहे थे, अब सिर ढकने की जगह तक नहीं रही।

मकान के एक हिस्से के ढहने से लोग नींद में ही गिरकर ग्राउंड फ्लोर पर आ गए।

मकान के एक हिस्से के ढहने से लोग नींद में ही गिरकर ग्राउंड फ्लोर पर आ गए।

जर्जर मकानों में 100 से अधिक लोग रह रहे स्थानीय निवासी रणजीत सिंह का कहना है- 7 मकान जर्जर हालत में है, जो कभी-भी गिर सकते हैं। इनमें 100 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। इनकी कभी मरम्मत नहीं हुई है। ये मकान पत्थर-चूने की बनी हुई है। इनमें किराए पर रहने वाले ज्यादातर लोग पश्चिम बंगाल के है।

हादसे वाली जगह पर आस-पास के कई मकानों की हालत जर्जर बनी हुई है।

हादसे वाली जगह पर आस-पास के कई मकानों की हालत जर्जर बनी हुई है।

हादसे के बाद जर्जर मकान को सील कर दिया गया है। परिवार बेघर हो गए हैं।

हादसे के बाद जर्जर मकान को सील कर दिया गया है। परिवार बेघर हो गए हैं।

मकान का पिछला हिस्सा गिरने के बाद पुलिस की टीम जांच करने पहुंची।

मकान का पिछला हिस्सा गिरने के बाद पुलिस की टीम जांच करने पहुंची।

जहां हादसा हुआ उस गली के सामने मुख्य सड़क पर स्मार्ट सिटी जयपुर का बोर्ड लगा नजर आया।

जहां हादसा हुआ उस गली के सामने मुख्य सड़क पर स्मार्ट सिटी जयपुर का बोर्ड लगा नजर आया।

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जयपुर में 4 मंजिला मकान ढहा, बाप-बेटी की मौत:5 लोग घायल, मुआवजे की मांग पर अड़े रिश्तेदार, शव लेने से इनकार

जयपुर में 4 मंजिला जर्जर हवेली भरभराकर ढह गई। मलबे में 7 लोग दब गए, सभी को बाहर निकाल लिया गया है। हादसे में पिता-पुत्री की मौत हो गई, दो बच्चों समेत 5 घायलों को SMS हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। जहां उपचार के बाद एक को छुट्टी दे दी गई। हादसा शुक्रवार रात 12 बजे सुभाष चौक सर्किल स्थित बाल भारती स्कूल के पीछे हुआ। हादसे के दौरान मकान में 20 लोग मौजूद थे। मकान का पिछला हिस्सा गिरते ही 13 लोग बाहर निकल गए थे। (पूरी खबर पढ़ें)



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