जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर सरावदा गांव के पास सिलेंडरों के धमाकों से पूरा इलाका थर्रा गया था।

मैं केबिन में लेटा मोबाइल पर रील देख रहा था। अचानक तेज आवाज आई। देखा तो पीछे एक टैंकर का केबिन आग का गोला बन गया था। सिलेंडर से भरा ट्रक आग की चपेट में आ गया था। मैं ट्रक से कूदकर खेतों में भाग गया। 3 से 5 मिनट में दो जलते सिलेंडर मेरे ट्रक के केबिन से आकर टकराए। थोड़ी देर हो जाती तो मैं भी कोयला बन गया होता।

पहला बयान सिविल डिफेंस के असरार अहमद, 108 एम्बुलेंस के कर्मचारी हनीफ व दूसरा बयान उस ट्रक के ड्राइवर रवि का है, जो सिलेंडर वाले ट्रक के पास खड़ा था।
7 अक्टूबर की रात केमिकल टैंकर ने घरेलू गैस सिलेंडर भरे खड़े ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी थी। हादसा जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर सरावदा गांव के पास हुआ था। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पलभर में 35 हजार लीटर खतरनाक ज्वलनशील केमिकल से भरे टैंकर का केबिन आग का गोला बन गया।
कुछ ही देर में गैस सिलेंडरों ने भी आग पकड़ ली। देखते ही देखते सिलेंडर ब्लास्ट होने लगे। सिलेंडर 40 से 50 फीट तक उछलकर ब्लास्ट हुए। धमाके 3 से 4 किमी तक सुनाई दे रहे थे। बचने के लिए लोग खेतों में छिप गए तो ड्राइवरों ने उल्टी गाड़ियां दौड़ाईं।
हादसे के तुरंत बाद भास्कर ने मौके पर पहुंचकर प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर पूरे मामले को समझा…

हादसे के बाद एक के बाद एक कई सिलेंडरों में ब्लास्ट हुए। इनके धमाके कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दिए।
हादसे में केमिकल से भरे टैंकर के ड्राइवर के चीथड़े उड़ गए। सबसे पहले टैंकर तक पहुंचने वाले सिविल डिफेंस के सीनियर कर्मचारी असरार अहमद और 108 एम्बुलेंस के कर्मचारी हनीफ ने बताया- आग बुझाने के बाद हम केबिन तक पहुंचे।
अंदर देखा ड्राइवर सीट पर कोई नहीं था। बस मांस का एक लोथड़ा पड़ा हुआ था। वह लोथड़ा बुरी तरह सीट से चिपक गया था। सीट पर दांत, खोपड़ी के टुकड़े, पांव की अंगुलियां व अन्य अवशेष थे। सबकाे समेटकर थैली में भरा और पोस्टमॉर्टम/डीएनए के लिए एसएमएस की मॉर्च्युरी में भिजवाया गया। बताया जा रहा है कि केमिकल से भरा यह ट्रक नसीराबाद (अजमेर) से आ रहा था।
एक अन्य घायल 27 वर्षीय सद्दाम को पहले दूदू और वहां से एसएमएस रेफर किया गया। टैंकर के ड्राइवर की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। सिलेंडर से भरे ट्रक का ड्राइवर लापता है।
आग पर काबू पाने के लिए किशनगढ़ (अजमेर), सांभर (जयपुर), फुलेरा (जयपुर), जयपुर शहर और मुहाना (जयपुर) से तीन दर्जन से भी अधिक दमकल की गाड़ियां पहुंची थीं। जयपुर से आए दमकल कर्मी कानाराम के दाएं पांव में बचाव कार्य के दौरान चोट आई है। इन्हें एसएमएस हॉस्पिटल ले जाया गया।
सिविल डिफेंस टीम के असरार अहमद ने बताया कि हम जब मौके पर पहुंचे तब केवल एक ही दमकल गाड़ी मौजूद थी। यह सड़क के दूसरी ओर खड़ी थी। बड़ी मुश्किलों से आग पर काबू पाया गया। कलेक्टर महोदय भी हमारे साथ ही मौके पर पहुंचे थे।

25 से 30 फीट ऊंची थीं आग की लपटें दूदू 108 एम्बुलेंस के कर्मचारी हनीफ हादसे के बाद मौके पर सबसे पहले पहुंचने वालों में से एक हैं। हनीफ बताते हैं- हम सरावदा पहुंचे तो आग की लपटें 25 से 30 फीट ऊंची थी। हिम्मत ही नहीं हुई कि ट्रक तक जा पाते। करीब एक किलोमीटर दूर से ही घटना के वीडियो बनाए और आग कम होने का इंतजार करते रहे।
इस बीच सिलेंडर फटने शुरू हो गए। सिलेंडर दिवाली के पटाखों की तरह एक के बाद एक फट रहे थे। आसमान में सिर्फ आग के गोले नजर आ रहे थे। दो सिलेंडर तो सड़क के दूसरी ओर बने सांवरिया होटल पर जा गिरे। एक कुर्सियों से टकराया। तीन-चार प्लास्टिक की कुर्सियों और खिड़की को भी नुकसान पहुंचा है। दूसरा सिलेंडर होटल के पीछे खाली मैदान में गिरा।

थैली में टैंकर चालक के शव के अवशेष। थैले में रखकर अवशेष को एसएमएस हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी भेजा गया।
5 मिनट की फुर्ती ने बचा ली जान, वरना कोयला बन जाता जिस गैस सिलेंडर से लदे ट्रक में टैंकर ने टक्कर मारी, उसके आगे एक और ट्रक खड़ा था। उसका ड्राइवर रवि गुजरात के मोरबी से लोडिंग माल लेकर कन्नौज (UP) जा रहा था।
रवि ने बताया- मैं शाम 5 बजे महादेव ढाबे पर खाना खाने और आराम करने के लिए रुका था। रात 10 बजे मैं मेरे ट्रक के केबिन में लेटकर मोबाइल पर रील देख रहा था। अचानक पीछे से जोरदार टक्कर हुई। आवाज सुनकर मैं घबरा गया। नीचे उतरकर देखा तो पीछे एक टैंकर का केबिन आग का गोला बन गया था। गैस सिलेंडर से भरा ट्रक भी आग की चपेट में था। मैं भागकर महादेव ढाबे के पीछे खेतों में दुबक गया।
इसके 3 से 5 मिनट बाद ही दो जलते हुए सिलेंडर मेरे ट्रक के केबिन से आकर टकराए। पूरा केबिन तहस-नहस हो गया। मैंने निकलने में थोड़ी भी देर की होती तो आज जिंदा नहीं होता।
सांवरिया होटल मालिक संतोष सिंह रावत ने बताया कि सालों से यहां ढाबा चला रहा हूं। पहली बार ऐसा हादसा देखा। हादसा हुआ तब मैं काउंटर संभाल रहा था। जैसे ही हादसे का पता चला, हम लोग होटल छोड़कर भाग गए। लौटकर देखा तो तबाही के मंजर से रूह कांप गई।

केमिकल से भरे टैंकर पर पांच घंटे तक डाला पानी आशंका जताई जा रही है कि ट्रक में भरे करीब 200 सिलेंडर फट गए। हालांकि अंधेरे और अफरा-तफरी के चलते सिलेंडरों की सही संख्या का अंदाजा लगा पाना अभी मुश्किल है। लोहे की मोटी चादर से बने इन सिलेंडरों को देखकर कहना मुश्किल था कि इनमें से सिलेंडर कौन सा है और ट्रक की बॉडी कौन सी। सिलेंडरों के फटे और टूटे हुए टुकड़े हादसे से करीब 30 फीट दूर तक बिखरे मिले।
आग की गर्मी का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हादसे के 3 घंटे बाद तक सड़क किनारे पड़ा बारिश का पानी गुनगुना था। केमिकल से भरे टैंकर का तापमान न बढ़े इसके लिए उस पर लगातार 5 घंटे तक पानी डाला गया। हादसे के बाद दूदू से लेकर मोखमपुरा तक ट्रैफिक जाम हो गया। बुधवार सुबह 4 बजे ट्रैफिक सुचारू हो पाया।

केमिकल से भरे टैंकर का तापमान कम करने के लिए लगातार पानी डाला गया।
ट्रक ड्राइवर बोले- RTO करता है परेशान, इसलिए हादसे हाईवे के ढाबों और होटलों पर मौजूद ड्राइवरों ने ऑफ कैमरा बताया- हाईवे पर दूदू से लेकर सावरदा, गिदानी, धर्म कांटा, मोखमपुरा, पड़ासोली, दांतरी और बगरू तक आरटीओ वाले लोडिंग ट्रक ड्राइवरों को परेशान करते हैं। पैसे की डिमांड करते हैं। इनसे बचने के लिए ड्राइवर इन स्पॉट से स्पीड में गाड़ी भगाने की कोशिश करते हैं। कई बार पीछा करने के चलते भी बड़े भारी वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।
साल भर में 20 से ज्यादा लोगों की जान चुकी है। 27 सितंबर को भी सावरदा से पहले इसी हाईवे पर दो ट्रक की टक्कर में पीछे एक ट्रक का ड्राइवर जिंदा जलकर मर गया था।

हादसे के बाद अधजले सिलेंडर पूरी कहानी बयां कर रहे थे।
डेढ़ से दो घंटे कोई पास भी न जा सका एम्बुलेंस कर्मी दिलीप सिंह मीणा ने बताया- रात 10 बजे हादसा हुआ। आग इतनी भयानक थी कि डेढ़ से दो घंटे तक हम आग बुझाने के लिए करीब नहीं जा सके। जब हालात कुछ सामान्य हुए तो बचाव कार्य शुरू किया।
दूदू के जीतू धमाके सुनकर वहां पहुंचे थे। जीतू बताते हैं- यहां पहुंचने के बाद मेरे सामने ही 7-8 सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ। पुलिस और प्रशासन ने समय से स्थिति को काबू कर ट्रैफिक रोक दिया। ऐसे में हादसे के आस-पास करीब 5 किलोमीटर तक कोई वाहन नहीं था।
सवारी बस के ड्राइवर लक्ष्मण सिंह कहते हैं- जिस टैंकर से एक्सीडेंट हुआ, मैं उससे तीन वाहन पीछे चल रहा था। टैंकर स्पीड में था। जाकर सीधे ट्रक में भिड़ गया। भिड़ंत के तुरंत बाद आग लग गई थी। सिलेंडर फटने शुरू हुए। हमने सवारियों को खेतों और हादसे से दूर सुरक्षित स्थान पर भागकर छुप जाने को कहा।
मध्य प्रदेश से अजमेर आए मनीष पाटीदार ने बताया- मेरी गाड़ी में 6 लोग थे। टक्कर मारने वाले टैंकर से 100 मीटर पीछे ही चल रहा था। टक्कर लगने के बाद ट्रक से सिलेंडर गिरने लगे। आग लग गई। यह देख मुझे खतरे का आभास हो गया था। मैंने तुरंत यू टर्न लिया और बैक में गाड़ी को हादसे से दूर ले गया।

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