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एडीएम सुदर्शन सिंह तोमर ने पॉश अधिनियम पर आधारित जानकारीपूर्ण बुकलेट और पोस्टर का विमोचन किया।

जिला प्रशासन, महिला अधिकारिता एवं एक्शन एड एसोसिएशन द्वारा चलाए जा रहे महिला श्रमिक उत्पीड़न मुक्त कार्यस्थल जागरूकता अभियान के अंतर्गत बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुदर्शन सिंह तोमर ने पॉश अधिनियम पर आधारित जानकारीपूर

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इस अवसर पर तालेड़ा उपखंड अधिकारी मनशवी नरेश, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और सहायक निदेशक महिला अधिकारिता भेरू प्रकाश नागर भी उपस्थित थे।

तोमर ने इस मौके पर कहा, महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक व उत्पीड़न रहित कार्य वातावरण प्रदान करना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है। इस प्रकार के अभियान समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

सहायक निदेशक महिला अधिकारिता भेरू प्रकाश नागर ने बताया कि महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन, महिला अधिकारिता विभाग और एक्शन एड के संयुक्त तत्वावधान में नब्बे दिवसीय जागरूकता अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

यह अभियान पॉश अधिनियम- कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।

पॉश अधिनियम में यौन उत्पीड़न को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग, अश्लील साहित्य दिखाना और यौन प्रकृति का कोई भी अवांछित व्यवहार शामिल है।

इस अधिनियम के अनुसार 10 या अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों पर नियोक्ताओं को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) स्थापित करने और एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक्शन एड जिला समन्वयक ज़हीर आलम ने जानकारी देते हुए बताया कि अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को कई बार विशेष चुनौतियों, असुरक्षा और कार्यस्थल पर असुरक्षित स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

अभियान अंतर्गत ऐसी महिलाओं को उनके कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने के लिए बने पॉश कानून के बारे में जानकारी दी जा रही हैं। जिससे अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं सुरक्षा और सम्मान के साथ काम करें। यह एक नब्बे दिवसीय अभियान है जो एक जुलाई से प्रारंभ हुआ और तीस सितंबर तक चलेगा।

अभियान के अंतर्गत विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा। इसमें कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका, शिकायत की प्रक्रिया, और पीड़िता के अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

पर्यवेक्षक प्रमिला ने अभियान से जुड़ी बुकलेट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें अधिनियम की प्रमुख धाराओं, प्रक्रिया, तथा आम भ्रांतियों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है ताकि यह आमजन के लिए सुलभ और समझने योग्य हो। इस दौरान जेंडर विशेषज्ञ विनीता अग्रवाल व पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केन्द्र प्रबंधक पूर्णिमा गौतम भी उपस्थित रहीं।



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