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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) के क्षेत्र में अपनी पैठ बना रहा है। टैक्स रिटर्न फाइलिंग से लेकर ऑडिटिंग और कंसल्टेंसी जैसे कार्यों में AI के इस्तेमाल ने काम को आसान तो बनाया है, लेकिन डेटा सिक्योरिटी और गलत जानकारी जैसी

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हाल ही में, जिओ ने मात्र ₹24 में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इससे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। एक्सपट्‌र्स के अनुसार, AI की मदद से ITR फाइल करने पर डेटा लीक होने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि AI उस डेटा को सार्वजनिक कर सकता है। इस वजह से पिछले कुछ समय से साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि AI का इस्तेमाल कितना सही है और कितना जोखिम भरा।

आइए जानते हैं इस विषय पर ICAI (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) के सेंट्रल काउंसिल मेंबर्स क्या कहते हैं…

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: अवसर या चुनौती? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ और ICAI में AI के चेयरमैन CA उमेश शर्मा कहते हैं- AI का प्रभाव हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मुख्य कार्य सवालों का सटीक जवाब देना होता है। चाहे वे नोटिस के जवाब हों, ऑडिट से संबंधित प्रश्न हों, क्लाइंट की वित्तीय सलाह हो, या सरकार द्वारा टैक्स स्लैब में बदलाव से जुड़े नए मुद्दे हों।

सीए उमेश शर्मा के अनुसार, जहां कहीं भी सवाल-जवाब की आवश्यकता होती है, लोग अब Chat GPT, जेमिनी या क्लॉड जैसे उपकरणों से भी वित्तीय प्रश्न पूछने लगे हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि इन उपकरणों द्वारा दिए गए सभी उत्तर सही हों।

वित्तीय मामलों में, सीए के जवाबों पर अधिक भरोसा किया जाता है, क्योंकि वे गहन अध्ययन और नियमों की समझ के आधार पर अपनी राय देते हैं। इसलिए, सीए के जीवन में AI का प्रभाव स्पष्ट है और इसे सकारात्मक रूप से उपयोग करने से कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

क्या आम आदमी AI से अपना आईटी रिटर्न खुद भर सकता है? सीए उमेश शर्मा बताते हैं- हाल ही में जियो ने ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जहां AI की मदद से बहुत कम पैसे में आईटी रिटर्न फाइल किया जा सकता है। छोटे रिटर्न्स के लिए यह सही विकल्प है, लेकिन अगर ट्रांजैक्शन जटिल हैं या बिजनेस बड़ा है तो AI पर निर्भर रहना मुश्किल है।

सरकार लगातार नए टैक्स स्लैब और बदलाव लाती रहती है, जिन्हें पढ़कर समझना और सही तरह से लागू करना केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा – AI से भरे गए रिटर्न्स पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता। खासकर फ्री टूल्स जैसे चैट जीपीटी या अन्य AI एप्लिकेशंस पर आंख बंद करके भरोसा करना गलत है। पेड सर्विसेज कुछ हद तक भरोसेमंद हो सकती हैं, लेकिन असली विश्वास चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सलाह पर ही किया जा सकता है।

क्या AI की वजह से समस्याएं भी सामने आई हैं? सीए उमेश शर्मा ने बताया कि भारत में आर्थिक अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल करीब 28 से 30 हजार करोड़ रुपए के फाइनेंशियल क्राइम हो रहे हैं। इसमें फेक कॉल्स, डिजिटल अरेस्ट, बैंक फ्रॉड और इंश्योरेंस स्कैम जैसी घटनाएं शामिल हैं।

कई लोग AI का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी कर रहे हैं। जरूरत है कि इस पर कड़े कानून बनाए जाएं। अगर कोई सीए AI का इस्तेमाल कर डॉक्यूमेंट तैयार करता है तो उसे स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए कि यह AI-जनरेटेड है। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता और लोग मान लेते हैं कि यह पूरी तरह सही है, जिससे वे मुसीबत में फंस जाते हैं।

सीए उमेश शर्मा ने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्रोफेशन में क्वालिटी, टाइम और कास्ट मैनेजमेंट जैसे फायदे जरूर हैं, लेकिन इसके भरोसेमंद इस्तेमाल के लिए सतर्कता और सही गाइडेंस जरूरी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना समय की जरूरत सतीश गुप्ता ने कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। इसे समझना और सीखना भविष्य में टिके रहने के लिए बेहद जरूरी है। चार्टर्ड अकाउंटेंसी प्रोफेशन में ऑडिट, टैक्स रिटर्न भरना, प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग, कैपिटल मार्केटिंग और फोरेंसिक जैसे क्षेत्रों में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। AI इन सब कार्य क्षेत्रों में स्पीड और एक्यूरेसी दोनों का समाधान है।

  • 24 रुपए में ITR भरना: बड़ा चैलेंज: सतीश गुप्ता ने कहा कि जियो ने हाल ही में एक ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है जिसमें सिर्फ ₹24 में AI की मदद से इनकम टैक्स रिटर्न भरा जा सकता है। यह चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक बड़ा चैलेंज है। यही वजह है कि AI को सीखना और समझना सीए के लिए जरूरी हो गया है।
  • स्पीड और एक्यूरेसी दोनों जरूरी: सतीश गुप्ता ने कहा- अगर मेरे पास 50 ऑडिट की फाइल है, 50 MRL भरने हैं और 50 रिपोर्ट बनानी है तो सबसे बड़ा सवाल स्पीड का होता है। AI इस समस्या का हल है, लेकिन केवल स्पीड काफी नहीं है। परफेक्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट वही है जो AI + ह्यूमन इंटेलिजेंस का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल कर स्पीड के साथ क्वालिटी सर्विस भी दे।
  • सुप्रीम कोर्ट का उदाहरण और AI की लिमिटेशन: AI डाटा पर काम करता है, इसलिए इसमें गलतियां भी हो सकती हैं। उन्होंने एक केस का जिक्र किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकील ने AI से निकले एक केस का हवाला दिया। बाद में पता चला कि ऐसा कोई केस अस्तित्व में ही नहीं है। यह पूरा हवाला AI ने काल्पनिक रूप से गढ़ दिया था। AI हमारी तरह असिस्टेंट की भूमिका निभा सकता है। आखिरकार एक्यूरेसी और क्वालिटी कंट्रोल के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस ही सबसे ज्यादा जरूरी है।
  • डाटा सिक्योरिटी पर खतरा: चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास क्लाइंट्स का संवेदनशील डाटा होता है। अगर कोई नोटिस आता है और उसका जवाब देने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल किया जाए तो यह संभव है कि AI उस डाटा को पब्लिक कर दे। इसमें क्लाइंट का नाम, कंपनी का नाम और केस की जानकारी उजागर हो सकती है। अगर मैं इसे अफोर्ड कर सकता हूं तो सही है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे बचा जा सकता है? सतीश गुप्ता ने कहा- AI इस्तेमाल करते समय सबसे ज्यादा ध्यान क्लाइंट की प्राइवेसी पर देना चाहिए। कभी भी सवाल पूछते समय क्लाइंट का नाम, कंपनी का नाम या ट्रांजैक्शन अमाउंट जैसे संवेदनशील डाटा को साझा नहीं करना चाहिए। AI को स्मार्ट तरीके से यूज करना होगा। केवल जनरल सवाल पूछना सुरक्षित है। लेकिन अगर आप सीधे क्लाइंट का डाटा डालते हैं तो उसकी प्राइवेसी खत्म हो सकती है। यही AI के इस्तेमाल का सबसे बड़ा रिस्क है। सतीश गुप्ता ने साफ कहा कि AI को असिस्टेंट की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जगह कभी नहीं ले सकता।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को मिलेगा नया आयाम ICAI के सेंट्रल काउंसिल मेंबर सीए रोहित रूवाटिया ने कहा कि जिस तरह कंप्यूटर ने अपनी जगह बनाई, उसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी हर प्रोफेशन में अपनी जगह बना रहा है। डॉक्टर से लेकर लीगल सेक्टर तक, हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए भी AI का उपयोग उतना ही जरूरी और प्रासंगिक है।

हर क्षेत्र में उपयोगी है AI रूवाटिया ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी के हर क्षेत्र में AI का उपयोग काम को और बेहतर बना सकता है। चाहे वह ड्राफ्टिंग हो, लीगल एडवाइस, ऑडिटिंग, एप्लायंसेज हों या कम्युनिकेशन और रिफॉर्म्स– कोई भी फील्ड ऐसी नहीं है जिसे AI बेहतर न बना सके।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार यह चर्चा होती है कि AI चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, लेकिन सच यह है कि AI का नॉलेज रखने वाले सीए का कॉम्बिनेशन बेहद स्ट्रॉन्ग होता है। ऐसे प्रोफेशनल्स के सफल होने की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।

कंसल्टेंसी का विकल्प नहीं है कोई टूल रूवाटिया ने कहा कि ITR भरना तो कोई भी कर सकता है – ई-मित्र से, किसी ऑनलाइन पोर्टल से या AI टूल्स की मदद से। लेकिन देश में उपलब्ध स्कीम्स, सरकारी एक्ट्स, और कंप्लायंसेज की सही जानकारी केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट ही दे सकते हैं। कोई भी टूल क्लाइंट को यह नहीं बता सकता कि उसके लिए कौन-सी सरकारी स्कीम फायदेमंद होगी, कौन-सा टैक्स रिफॉर्म लागू है, या किस स्थिति में कौन-सा कदम उठाना चाहिए। यह केवल ह्यूमन इंटेलिजेंस और अनुभव ही बता सकता है। यही चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सबसे बड़ी ताकत है। रोहित रूवाटिया ने साफ कहा कि AI प्लेटफॉर्म्स केवल सुविधा दे सकते हैं, लेकिन असली भरोसा और सही कंसल्टेंसी हमेशा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से ही मिलेगी।

अकाउंटिंग और कम्युनिकेशन में सहायक अंकुर गुप्ता ने बताया कि कई ऐसे टूल्स मौजूद हैं, जिनसे ऑटो-मेलिंग और मैसेजिंग आसान हो गई है। इससे समय की बचत होती है और क्लाइंट्स को त्वरित रिस्पॉन्स दिया जा सकता है। इसके अलावा मार्केट में कई AI-आधारित अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध हैं जो बुक-कीपिंग, ऑडिटिंग और टैक्सेशन से जुड़े काम को तेज़ और सटीक बना रहे हैं।



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