राजस्थान में पहला सेक्स सोर्टेड सीमन बैंक सोमवार से जयपुर जिले के बस्सी में शुरू होगा। यह सुविधा नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) और राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) के सहयोग से शुरू की जा रही है। बस्सी में साल 1977 से संचालित फ्रोज
123 सांडों से कन्वेंशनल सीमन डोज तैयार होते हैं
राजस्थान सरकार के केबिनेट मंत्री पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग जोराराम कुमावत ने बताया- इस लैब में सालाना 25 लाख से अधिक सेक्स सोर्टेड सीमन डोज तैयार होंगी, जो वर्तमान में विदेश से आयातित डोज की तुलना में करीब 75% सस्ती होंगी। इससे न केवल राजस्थान की मांग पूरी होगी, बल्कि अन्य राज्यों को भी डोज उपलब्ध कराई जा सकेगी। फिलहाल बस्सी में 123 सांडों से कन्वेंशनल सीमन डोज तैयार होते हैं, जबकि प्रदेश का दूसरा सीमन बैंक जोधपुर में है, जहां सालाना करीब 12 लाख कन्वेंशनल डोज तैयार किए जाते हैं।

हाल ही में केबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने लैब का निरीक्षण कर जानकारी ली थी।
सात नस्लों का सीमन तैयार होगा
लैब में नई तकनीक से भैंस की मुर्रा नस्ल, गाय की विदेशी नस्ल हॉलस्टियन फ्रोजियन (एचएफ), क्रॉसब्रिड हॉलस्टियन फ्रोजियन (सीबीएचएफ), और देशी नस्लें गिर, साहीवाल, थारपारकर व राठी के सेक्स सोर्टेड डोज तैयार किए जाएंगे। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल के मादा बछड़े मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन और आय में वृद्धि होगी।
जानिए क्या है सेक्स सोर्टेड सीमन
सेक्स सोर्टेड सीमन एक तकनीक है, जिसमें मादा शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाई जाती है, जिससे मादा बछिया पैदा होने की संभावना 90% से अधिक होती है। इसका उपयोग कृत्रिम गर्भाधान (AI) के माध्यम से किया जाता है। यह तकनीक नर पशुओं की संख्या नियंत्रित करने में मदद करती है और आवारा पशुओं की समस्या को कम कर सकती है। पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या सीमन स्टेशन से यह डोज प्राप्त कर सकते हैं।
नस्ल सुधार में अहम कदम
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पशुपालन का लगभग 10% हिस्सा है, जबकि कृषि और पशुपालन मिलकर राज्य की जीडीपी में 22% योगदान देते हैं। दूध उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य में चल रहे नस्ल सुधार कार्यक्रमों के तहत बस्सी में सेक्स सोर्टेड सीमन लैब की स्थापना को पशुपालन क्षेत्र के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
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