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राजस्थान की पारंपरिक छतरियों, बावडिय़ों, देवालयों और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों को कानूनी संरक्षण देने की मांग उठी है। सेव ऑवर हेरिटेज फाउंडेशन के प्रस्ताव पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिख

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फाउंडेशन के चेयरमैन अरिहंत सिंह चरड़ास ने 21 जुलाई को मंत्री शेखावत को इस संबंध में पत्र भेजा था। इससे पहले 22 जून को हुई एक ऑनलाइन बैठक में संगठन के संयोजक हुकम सिंह पड़ासला ने यह मुद्दा उठाया था। मंत्री शेखावत ने तब सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया था।

फाउंडेशन ने अपने पत्र में बताया कि संवत 2012 (वर्ष 1955) के भूमि सेटलमेंट में राजस्थान के विभिन्न जिलों की अनेक धरोहरें सामान्य खातेदारी भूमि के अंतर्गत दर्ज हो गईं। इससे उनके संरक्षण में समस्याएं पैदा हो गई हैं। कानूनी दर्जे के अभाव में इन स्थलों पर अतिक्रमण, क्षरण और अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में आग्रह किया है कि इन धरोहर स्थलों को संवत 2012 से पूर्व की स्थिति के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

अरिहंत सिंह चरड़ास ने उम्मीद जताई है कि केंद्र व राज्य स्तर पर समन्वय से राजस्थान की बिखरी धरोहरों को राजस्व अभिलेखों में स्थान मिलेगा। इससे भविष्य की पीढ़ियों को इन विरासतों का गौरवशाली इतिहास देखने और समझने का अवसर मिलेगा।



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