रैवासा धाम में 12 से 18 अगस्त तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने भक्तों को परम धर्म का गहन बोध कराया। कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों के माध्यम से भक्ति, तिलक धारण और ठाकुर जी की से

श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय।
पंडित इंद्रेश ने संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के श्लोक सुनाते हुए कहा- परम धर्म वही है, जहां इंद्रिय सुख की भावना नहीं, बल्कि ठाकुर जी के सुख की कामना हो। वृंदावन जाना धर्म हो सकता है, लेकिन यदि वहां जाने का उद्देश्य केवल लस्सी या पेड़ों का आनंद लेना हो, तो यह परम धर्म नहीं। परम धर्म तब है, जब ठाकुर जी के दर्शन की व्याकुलता और उनके प्रति प्रेम ही एकमात्र भाव हो।
कथावाचक ने तिलक धारण को ठाकुर जी का ‘चिन्ह’ बताया। जैसे गाय या भेड़ों पर उनके मालिक का निशान होता है, वैसे ही तिलक हमारी पहचान है। यह ठाकुर जी को बताता है कि हम उनके हैं। जैसे बच्चे स्कूल में आईडी कार्ड पहनते हैं ताकि खो जाने पर उनका घर मिल जाए, वैसे ही तिलक हमारा आध्यात्मिक आईडी कार्ड है। यह ठाकुर जी को बुलाने का हेलीपैड है, जो हमें भटकने से बचाता है।

श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए रोजाना हजारों की तादाद में दूर-दराज से लोग आ रहे हैं।
कथा में उपाध्याय ने भक्तों को नित्य तिलक, तुलसी माला और कीर्तन की स्थिति में रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परम धार्मिक व्यक्ति हर क्रिया में यह विचार करता है कि ठाकुर जी मुझे देख रहे हैं और मुझे उनके अनुकूल बनना है।
रैवासा धाम में चल रहे ‘श्री सियपिय मिलन महोत्सव’ के इस भव्य आयोजन में हजारों भक्त कथा का रसपान कर रहे हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 4 बजे से शाम 7 बजे तक हो रही है। कथा में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री और योग गुरु बाबा रामदेव जैसे संत-महात्मा भी शामिल होंगे।

पंडित इंद्रेश उपाध्याय के साथ सेल्फी लेते हुए कथा में पहुंचे भक्त।
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