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क्रिकेट की पिच पर राजस्थान राज्य स्पोर्ट्स काउंसिल से आरसीए हार गया है। 2019 में जब स्पोर्ट्स काउंसिल से एमओयू हुआ था, उस समय सिर्फ 50 लाख देकर आरसीए को पूरे साल के लिए ‘मालिकाना’ हक मिल गया था। यहां तक कि SMS स्टेडियम के मेन ग्राउंड और एकेडमी ग्राउं
वहीं, स्पोर्ट्स काउंसिल से एमओयू नहीं होने का सीधा असर एसएमएस में होने वाले मैच और खिलाड़ियों की इंटरनेशनल सुविधाओं पर पड़ेगा। कई मैच एसएमएस से अन्य जगह शिफ्ट हो सकते हैं। वहीं, आरसीए को सालाना लगभग 2.5-3 करोड़ रुपए नुकसान उठाना होगा। इसमें आईपीएल और इंटरनेशनल मैचों से ही लगभग 2 करोड़ का नुकसान शामिल है। शेष | पेज 6
एमओयू से आरसीए को ये होते थे फायदे
- 50 लाख देकर ‘मालिकाना’ हक मिल जाता था आरसीए को
- 30 लाख हर इंटरनेशनल-आईपीएल मैच के बचते थे।
- 30 लाख के करीब थर्ड पार्टी से कमाता था आरसीए।
- 30 लाख साल के आरसीए एकेडमी होटल-रेस्टोरेंट से मिलते थे
- 40% छूट थी खिलाड़ियों और स्टाफ को होटल-रेस्टोरेंट से
काउंसिल लेजेन-जी से कमाएगा ~40-50 लाख
अब किसी को भी एसएमएस स्टेडियम व एकेडमी ग्राउंड व नॉर्थ-साउथ ब्लॉक को किराए पर देने का अधिकार स्पोर्ट्स काउंसिल के पास है। एसएमएस में अगले महीने लेजेन-जी लीग होनी है। इसमें पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भी खेलते नजर आएंगे। 8 दिन की इस लीग से करीब 40-50 लाख स्पोर्ट्स काउंसिल कमाएगा। ये सब एमओयू होने की स्थिति में आरसीए के खाते में आता।
अब आरसीए में जरूरी मैचों का ही आयोजन करेंगे। जयपुर में अन्य ग्राउंड हमें सस्ते में मिल जाएंगे। -दीनदयाल कुमावत, कन्वीनर, एडहॉक आरसीए
एमओयू से सरकार (स्पो. काउंसिल) को ही नुकसान है। अब राजस्थान क्रिकेट संघ से एमओयू नहीं करेंगे। हर ग्राउंड का प्रतिदिन के हिसाब से किराया लेंगे। – नीरज के. पवन, अध्यक्ष, राजस्थान राज्य स्पोर्ट्स काउंसिल
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