IIT जोधपुर परिसर में डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच मारपीट के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है । डायरेक्टर अविनाश कुमार ने दावा किया है कि यह हमला पूर्व नियोजित था। इसमें प्रभावशाली लोग और राजस्थान के ADG शामिल हैं। उन्होंने हमला करने वाले
IIT जोधपुर के डायरेक्टर अविनाश कुमार ने बताया- हमलावर एसोसिएट प्रोफेसर है, जो 2020 में पूर्व निदेशक की ओर से केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में नियुक्त किया गया था। इस प्रोफेसर का गुस्सैल व्यवहार का इतिहास रहा है। व्यावहारिक समस्याओं के कारण उसे एसोसिएट डीन (R&D) के पद से एक साल से भी कम समय में हटाना पड़ा था। 5 साल में इस व्यक्ति की कोई रिसर्च नहीं थी। विभाग में अक्सर बुरे व्यवहार की शिकायतें आती रहीं।
डायरेक्टर ने बताया- घटना के दिन (2 सितंबर ) जब मैंने विभागाध्यक्ष और डीन फैकल्टी की उपस्थिति में इस प्रोफेसर के गैर शैक्षणिक प्रदर्शन के कारण पूछे और उसकी काउंसलिंग का प्रयास किया तो उसने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में मेरे दाहिने पैर में फ्रैक्चर हो गया। हमलावर ने स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड पर भी हमला किया। विशेष रूप से उसने एक SC श्रेणी के युवा स्टाफ सदस्य को बुरी तरह पीटा और उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

पूर्व नियोजित हमले के सबूत डायरेक्टर के अनुसार यह हमला पूर्व नियोजित था। हमलावर निदेशक के ऑफिस में एक बैग लेकर आया था। उसे सिक्योरिटी गार्ड ने रोका था। बाद में पता चला कि इस बैग में हथियार था। जिसे बाद में करवड़ पुलिस ने नष्ट कर दिया। निदेशक का मानना है कि इस हमले का मकसद या तो उन्हें मारना था या फिर इतना बड़ा बवाल खड़ा करना था कि उन्हें IIT जोधपुर से हटाया जा सके।
पुलिस तंत्र में कथित मिलीभगत इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस व्यवस्था की भूमिका है। निदेशक के अनुसार, IIT जोधपुर के पुलिस को सूचित करने से पहले ही पुलिस अधिकारी हमलावर को कॉल कर रहे थे। यह साफ संकेत देता है कि यह घटना पूर्व नियोजित थी। पुलिस अधिकारी इसमें शामिल थे।
हमलावर को मात्र 3 घंटे में बिना गिरफ्तारी के रिहा कर दिया गया। संस्थान की FIR अगले 8 घंटों तक दर्ज नहीं की गई। जब FIR दर्ज की गई तो वह एक कमजोर मामला था। इसमें कई खामियां थीं। हमलावर को रात 10 बजे कैंपस से उठाया गया, लेकिन उसकी गिरफ्तारी देर रात 2 बजे दिखाई गई। ताकि तारीख बदल जाए और 14 घंटे से कम का दिखाया जा सके।
न्यायिक प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप निदेशक के अनुसार, डीसीपी (पूर्व) की पत्नी और ससुर (दोनों न्यायपालिका में हैं) ने हमलावर को जमानत दिलाने में भूमिका निभाई। हमलावर को सभी धाराओं में 14 घंटे से कम समय में जमानत मिल गई। जमानत की सुनवाई की जानकारी संस्थान और प्रभावित स्टाफ सदस्य को उचित रूप से नहीं दी गई। पुलिस ने स्टाफ सदस्य से कहा था कि कोर्ट में आने की जरूरत नहीं है।

विकसित भारत 2047 पर सवाल निदेशक अग्रवाल ने सवाल उठाया है कि क्या भारत 2047 तक विकसित देश बन सकता है। जब इस तरह से लोकतांत्रिक संस्थानों में व्यवस्था को इस हद तक मैनिपुलेट किया जा रहा है। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, क्षेत्रवाद और गैर-प्रदर्शन को जड़ से खत्म करने का उनका अभियान जारी रहेगा।
पुलिस और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा निदेशक अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में शामिल सभी लोगों की जांच होनी चाहिए। ताकि उनकी मिलीभगत और इस घिनौने अपराध में भागीदारी साफ तौर पर स्थापित हो सके। उन्होंने सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण आस्था जताते हुए कहा कि वे न्याय दिलाने का काम करेंगे।
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IIT जोधपुर परिसर में डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच मारपीट हुई। एसोसिएट प्रोफेसर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि विभागीय मीटिंग के दौरान एसोसिएट प्रोफेसर ने गाली-गलौज करते हुए जानलेवा हमला कर दिया। (पूरी खबर पढ़ें)
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