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राजस्थान हाईकोर्ट ने दो शादी के मामले में हनुमानगढ़ जिले की विनोद कुमारी की अपील को सबूत के अभाव और गवाहों के विरोधाभासी बयानों के आधार पर खारिज कर दिया है। जस्टिस फरजंद अली की कोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा कि अभियोजन पक्ष अपना दूसरा विवाह स

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विनोद कुमारी ने अपने पति प्रेम कुमार पर आरोप लगाया था कि उसने पहली शादी के रहते हुए कमला नाम की महिला से दूसरी शादी की है। इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाने के बाद ट्रायल कोर्ट ने प्रेम कुमार और कमला को आईपीसी की धारा 494 के तहत दो विवाह का दोषी मानते हुए दो साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 15,000 रुपए जुर्माना भी लगाया था। जबकि, सुखदेव, कृष्ण, रुखमणी और बनवारी लाल को धारा 494/109 के तहत दुष्प्रेरण का दोषी मानते हुए एक साल सश्रम कारावास और 15,000 रुपए जुर्माने की सजा दी थी।

अपीलीय कोर्ट ने सभी को किया था बरी

ट्रायल कोर्ट के फैसले को आरोपियों द्वारा चुनौती दी गई। उसी अपील पर स्पेशल जज (SC/ST एक्ट) हनुमानगढ़ ने 28 मार्च 2017 को अपील की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अपीलीय कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि प्रेम कुमार ने वैध रीति-रिवाज के साथ दूसरी शादी की है। इस फैसले के खिलाफ विनोद कुमारी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

गवाहों के बयानों में विरोधाभास

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। विनोद कुमारी ने कहा था कि वह पैसेंजर बस से शादी के स्थान पर गई थी, जबकि गवाह जोरूराम ने कहा कि वह जीप से गोगामेडी गया था। इसके अलावा गवाह राधेश्याम ने कहा कि वह ट्रेन से गया था, जबकि अर्जुन राम ने कहा कि वे दोनों साथ में ट्रेन से गोगामेडी गए थे। अभियोजन पक्ष का केस था कि शादी रामगढ़ में हुई थी, लेकिन गवाहों ने गोगामेडी जाने की बात कही।

पति-पत्नी के रूप में रहने के आरोप अपर्याप्त

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 494 के तहत द्विविवाह का अपराध साबित करने के लिए दो मुख्य बातें जरूरी हैं। 1- पहली शादी वैध और कायम होना चाहिए। 2- दूसरी शादी भी सभी आवश्यक रीति-रिवाज और परंपराओं के साथ हुई हो, जो कानूनन वैध मानी जाए। केवल सह-निवास या पति-पत्नी के रूप में रहने के आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा भौराव शंकर लोखंडे बनाम महाराष्ट्र राज्य, कंवल राम बनाम हिमाचल प्रदेश प्रशासन और प्रिया बाला घोष बनाम सुरेश चंद्र घोष के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी शादी सभी आवश्यक रीति-रिवाज के साथ होना साबित करना जरूरी है।

15 साल पहले शादी, बाद में पति ने निकाला

विनोद कुमारी और प्रेम कुमार की शादी करीब 15 साल पहले हुई थी। दोनों लंबे समय तक साथ रहे, लेकिन बाद में विनोद कुमारी को ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने पति के खिलाफ धारा 498A और 406 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था। साथ ही धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता के लिए भी केस किया था। बाद में जब उसे पता चला कि प्रेम कुमार ने कमला से दूसरी शादी की है, तो उसने द्विविवाह का मुकदमा दर्ज करवाया।

सबूतों की कमी के कारण बरी

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास न तो कोई दस्तावेजी सबूत है और न ही कोई विश्वसनीय गवाह है जो यह साबित कर सके कि प्रेम कुमार ने कमला से वैध शादी की है। जगदीश और शंकरलाल नाम के दो गवाह, जिन्होंने कथित तौर पर विनोद कुमारी को शादी की जानकारी दी थी, उन्हें भी गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। चारों गवाहों के बयानों में इतने विरोधाभास हैं कि इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने अपीलीय कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए विनोद कुमारी की अपील को खारिज कर दिया।



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