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बरसाती मौसम ने एक बार फिर डीग जिले की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। मानसून की बाद से मकान के आसपास भरा पानी कमजोर नींव वाले मकान लोगों के लिए मौत का जाल साबित हो रहे हैं। एक ही सीजन में अब तक करीब 10 से 12 मकान धराशायी हो चुके हैं, जिसमें कई परि
जानकारी के अनुसार घटना के समय मकान मालिक शमीम मेव रोजगार के लिए हैदराबाद गया हुआ था। उनकी पत्नी आयशा मेव अपने पांच बच्चों के साथ मकान में सो रही थी। दो बच्चे ऊपरी मंजिल पर थे और तीन बच्चे मां के साथ नीचे सो रहे थे।
अचानक रात में मकान भरभराकर गिर गया। पांच वर्षीय बच्ची जारा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 वर्षीय शाहरूख, 15 वर्षीय जैद, सैफ और 40 वर्षीय पत्नी आईशा घायल हो गए। घायलों को ग्रामीणों की मदद से मलबे से बाहर निकाला गया और जुरहरा के चिकित्सालय पहुंचाया गया। वहां से हालत नाजुक होने पर सभी को भरतपुर रैफर किया गया। रास्ते में ही सैफ ने दम तोड़ दिया।
मस्जिद पहुंचकर आवाज लगाई, तो गांव वाले बचाने दौड़े
घटना स्थल से 300 मीटर दूर रहे रहे पीड़ित के भाई मुरसलीन ने बताया कि देर रात सभी सो रहे थे अचानक तीन बजे जोरदार धमाका हुआ। मैं अपने घर में सो रहा था, बाहर निकला तो देखा कि समीर का दो मंजिला मकान ढह गया। मैं घर पहुंचा ताे देखा कि पूरा परिवार ही मकान के मलबे में दबा हुआ था। मैंने मस्जिद पहुंचकर ऐलान किया कि समीर का मकान ढह गया है। सुनते ही गांव वाले दौड़े और मलबा हटाकर परिजनों को बाहर निकाला। लेकिन किस्मत इतनी बेरहम थी कि 5 वर्षीय मासूम जारा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अस्पताल ले जाते वक्त 15 वर्षीय बेटे जैफ ने भी जिंदगी की डोर छोड़ दी। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। देर रात का वो खौफनाक मंजर गांववालों की रूह तक हिला गया।
“बरसात से पहले ही स्थानीय स्तर पर पानी निकासी का पूरा इंतजाम होना चाहिए। लंबे समय तक मकान की नींव में पानी भरा रहने से नींव कमजोर हो जाती है और नींव कमजोर होने के बाद मकान गिरने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समय रहते जल निकासी और मकानों की मरम्मत पर ध्यान देना जरूरी है।” -संजय गोस्वामी, रिटा. कनिष्ठ अभियंता
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