जालोर शहर समेत जिले भर में हरियाली तीज का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। रविवार को शहर के सिरे मंदिर रोड स्थित शीतला माता मंदिर के पास मोसली नाड़ी पर 31 से अधिक भाई-बहनों के जोड़ों ने वर्षों पुरानी “समुंदर हिलोरने” की परंपरा निभाई।
इस अवसर पर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर सुबह 10 बजे गोडिजी, सिरे मंदिर रोड सहित अन्य जगह से समूह में गीत गाते हुए जुलूस निकाला और मोसली नाड़ी (तालाब) पहुंचीं। जहां उन्होंने “ओ म्हारा सासूजी समंदरियो हिलोरा खाए”, “वीरा दल बादल उजले” जैसे लोकगीत गाए, वहीं धार्मिक आस्था के साथ रस्म निभाई।

समंदर हिलोर जाते हुए रास्ते में नाचते हुए महिलाएं
समंदर हिलोरने की रस्म निभाई
भाई बहनों ने तालाब में खड़े होकर पहले समंदर हिलोरने की रस्म अदा की गई। इसके बाद भाइयों ने अपनी बहनों को चुनरी ओढ़ाई और एक-दूसरे को तालाब का जल पिलाया। जिसके बाद जल देवता को मातर का व नारियल का भोग लगाया।
इस आयोजन के दौरान बहनों ने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों के ससुराल में सुख-समृद्धि की मंगल कामना की और उपहार भेंट किए। तालाब पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।

तालाब पर समंदर हिलोरने की रस्म के दौरान लगी लोगों की भीड़।

समंदर हिलोरने के दौरान बहन को चुनरी ओढ़ाते भाई।

समंदर हिलोरने की रस्म निभाते भाई-बहन

तालाब का पानी पिलाते भाई।

समंदर की रस्म निभाते भाई-बहन।

तालाब पर जाती महिलाएं।
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