300 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने जानी होम्योपैथी की खूबियां
झुंझुनूं में शनिवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के प्रभावी परिणामों और इसके बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। सूचना केंद्र सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में जिलेभर से आईं 300 से अधिक एएनएम, आशा सहयोगिनी और आंगनबा
गंभीर बीमारियों में होम्योपैथी का सफल प्रयोग
कार्यशाला के दौरान, कई आशा सहयोगिनियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को होम्योपैथिक उपचार से बड़ी राहत मिली। आशा सहयोगिनी पुष्पा ने एक मरीज का केस साझा किया जो पित्त की पथरी से लंबे समय से पीड़ित थी। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह ऑपरेशन नहीं करा सकती थी। होम्योपैथिक उपचार शुरू करने के केवल तीन दिनों में ही उसका दर्द पूरी तरह खत्म हो गया और उसे काफी आराम मिला।

होम्योपैथी एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपचार
इसी तरह, आशा कार्यकर्ता आशा सैनी ने एक महिला मरीज के बारे में बताया जो यूरिन इंफेक्शन से परेशान थी और कई तरह की दवाओं के बाद भी ठीक नहीं हो रही थी। होम्योपैथिक दवाओं से वह मात्र एक महीने में पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
क्या एक ही खुराक से हो सकता है इलाज?
कार्यशाला में आशा सहयोगिनी सुमन स्वामी ने एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा, “क्या केवल एक डोज से ही इलाज संभव है?” इस पर प्रशिक्षकों ने समझाया कि होम्योपैथी का मुख्य उद्देश्य शरीर की जीवनी शक्ति (Very important Pressure) को सक्रिय करना है। जब सही दवा का चुनाव होता है, तो उसकी एक ही खुराक उपचार के लिए पर्याप्त हो सकती है, जिससे बीमारी का स्थाई समाधान मिलता है। यही कारण है कि होम्योपैथी को एक प्राकृतिक और टिकाऊ चिकित्सा पद्धति माना जाता है।
जन-जन तक होम्योपैथी पहुंचाने का संकल्प
कार्यशाला के मुख्य अतिथि, जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने होम्योपैथी को एक सुरक्षित और सर्वसुलभ चिकित्सा पद्धति बताया। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को इस उपचार से जोड़ें। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ तत्काल राहत नहीं देती, बल्कि मरीज के शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ भी करती है।”

जिला कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बढ़ावा देने का किया आह्वान, झुंझुनूं में होम्योपैथी पर कार्यशाला
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि जिले में होम्योपैथिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनजीओ से संपर्क किया जाएगा। इसके अलावा, डॉ. रमेश यादव द्वारा ब्लॉक स्तर पर नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक स्वास्थ्यकर्मी इस पद्धति का लाभ उठा सकें।
कार्यशाला में पूर्व जिला कलेक्टर प्रदीप कुमार बोरड़, महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक बिजेंद्र सिंह राठौड़, और महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक विप्लव न्यौला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। विशेषज्ञों डॉ. रमेश यादव, डॉ. विनोद, डॉ. चंद्रभान और डॉ. आसिफ मुस्ताक खान ने इस कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया।
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