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राज्यपाल ने विधानसभा के मानसून सत्र में पारित कोचिंग सेंटर नियंत्रण और मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। विधि विभाग के शुक्रवार को अधिसूचना जारी करते ही यह दोनों बिल अब कानून लागू हो गए हैं। इसके साथ ही 100 या इससे अधिक विद्यार्थियों व
पहले यह जुर्माना मामूली एक हजार रुपए तक ही था। विधि विभाग के अनुसार राजस्थान कोचिंग सेन्टर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 गत सितंबर को पारित किया गया था। इस मामले में राजभवन से अनुमति मिलने के साथ ही अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस कानून के तहत उन सभी कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा, जिनमें सौ या इससे अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। संस्थानों की ओर से नियमों के उल्लंघन पर पहली बार में 50 हजार रुपए और दूसरी बार में दो लाख रुपए जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके बाद भी नियमों की अवहेलना पर रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर सकेगी सरकार।
विद्यार्थियों को तनाव रहित अध्ययन के लिए प्रत्येक कोचिंग संस्थान में मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और तनाव प्रबंधन के सेशन कराए जाएंगे। वहीं परिजनों से नियमित संवाद की व्यवस्थाएं संस्थान की ओर से हो सकेगी। मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लग सकेगा।
बिना अनुमति के मछली पकड़ने पर 50 हजार तक जुर्माना यह बिल 8 सितंबर को विधानसभा में पारित किया गया था। राज्यपाल की मंजूरी एवं अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश में अब बिना अनुज्ञा पत्र के मछली पकड़ने, विस्फोटक अथवा विष डालकर मछली मारने जैसे मत्स्य अपराधों पर जुर्माना बढ़ गया है। पहली बार अपराध करने पर तीन माह की कैद के साथ अब 25 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। इसी तरह दूसरी बार अपराध करते पकड़े जाने पर छह महीने की जेल के साथ 50 हजार रुपए तक जुर्माना लागू लगेगा।
मूल उद्देश्य नदी-नालों, तालाबों में अवैध रुप से मछली पकड़ने को रोकना है। गौरतलब है कि राजभवन ने पिछले दिनों एम्स की तर्ज पर जयपुर में राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) स्थापित करने वाले बिल को भी मंजूरी दे दी है। यह भी इसी सत्र में पारित किया गया था। इस पर 750 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा गया है।
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