चित्तौड़गढ़ जिले के राश्मी में गूगल मैप की गलती से एक परिवार के 3 लोगों की जान चली गई थी। गूगल मैप ने टूटी हुई पुलिया को सही रास्ता बताया था। इसके कारण भीलवाड़ा से चित्तौड़गढ़ में अपने गांव जा रहे 9 लोगों की वैन टूटी पुलिया पर तेज बहाव में बह गई थी। इनम
हादसे के 3 दिन बाद पुलिया को अब गूगल मैप ने “टेंपरेरी क्लोज्ड” दिखाना शुरू कर दिया है। गूगल मैप ने हालात की ताजा तस्वीरें भी मैप पर अपलोड की हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति इस रास्ते से जाने की गलती न करें।
दरअसल, भास्कर ऐप पर बुधवार (27 अगस्त) को ‘चित्तौड़गढ़ में गूगल मैप के कारण बनास में बही वैन:3 की मौत, एक बच्ची लापता, 5 लोगों ने गाड़ी पर चढ़कर बचाई जान’ खबर प्रकाशित की गई थी।
इसके बाद सिलसिलेवार गूगल मैप की गलतियों का खुलासा किया गया था। गूगल मैप ने आज (29 अगस्त) अपने मैप के सिस्टम में सुधार किया।

यह वही सोमी-उपरेड़ा पुलिया है, जिसे गूगल मैप ने सही रास्ता बताया था। जबकि यह पुलिया 3 साल से टूटी हुई, जिसे आवाजाही के लिए बंद रखा है।
26 अगस्त की रात को बह गई थी वैन हादसा 26 अगस्त की देर रात हुआ था। वैन से एक परिवार के 9 लोग भीलवाड़ा से चित्तौड़गढ़ स्थित अपने गांव कानाखेड़ा लौट रहे थे। परिवार में मदनलाल (25), हितेश (16), लीला (18), काव्यांश (9 माह), आयांश (9 माह), चंदा (21), ममता (25), खुशी (4) और रूत्वी (6) शामिल थे।
रात करीब एक बजे परिवार ने सबसे पहले सांखली पुलिया से होकर जाने की कोशिश की। लेकिन वहां बनास नदी में तेज बहाव के चलते रास्ता बंद कर दिया गया था। इसके बाद मदनलाल ने दूसरा रास्ता खोजा और गूगल मैप की मदद से आगे बढ़ने का निर्णय लिया था।
गूगल मैप ने दिखाया था गलत रास्ता गूगल मैप ने उन्हें सोमी-उपरेड़ा पुलिया के रास्ते से गांव तक पहुंचने का रास्ता दिखाया। परिवार को जानकारी नहीं थी कि यह पुलिया 3 साल से टूटी हुई है और बंद पड़ी है। वहां न तो कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही रास्ता अवरुद्ध किया गया था। गूगल मैप पर किसी प्रकार का अलर्ट भी नहीं दिख रहा था। परिवार को रात के अंधेरे में यह पुलिया टूटी हुई दिखाई नहीं दी और गाड़ी सीधे पानी के तेज बहाव में करीब 300 मीटर बह गई।

गूगल मैप ने हादसे के 3 दिन बाद शुक्रवार को पुलिया को अस्थायी तौर पर बंद दिखाना शुरू कर दिया।
तीन का अंतिम संस्कार हुआ, बच्ची की तलाश जारी हादसे में वैन सवार 9 लोग गाड़ी की छत पर खड़े हुए, लेकिन बहाव में गाड़ी का बैलेंस बिगड़ा और आपस में पकड़ रखे हाथ छूट गए। हालांकि मोबाइल की सूचना के आधार पर 5 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। इनमें मदनलाल, हितेश, लीला, काव्यांश और आयांश शामिल हैं।
लेकिन चंदा (21), ममता (25) और 4 साल की खुशी की डूबने से मौत हो गई। तीनों का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में कर दिया गया। जबकि 3 दिन बाद भी रूत्वी (6) की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।


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