प्राज्ञ भवन बापू नगर में धर्मसभा में प्रियदर्शन मुनि कहा कि प्रभु अनंत कृपा करके हमें संसार से पार होने का मार्ग बताते हैं। श्रमण या साधु सत्य के मार्ग पर चलने वाला यात्री होता है। उन्हीं सत्य पथ पर चलने वाले श्रमण का अनुकरण, अनुसरण कर सत्य का अन्वेष
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श्रावक के 12 व्रत बताए हैं। सातवें व्रत का नाम है उपभोग-परिभोग परिमाण व्रत। इस व्रत में 26 प्रकार के पदार्थों की मर्यादा बताई गई है। जो वस्तु एक बार उपयोग में आए वो उपभोग वस्तु कहलाती है। जो वस्तुएं बार-बार प्रयोग में आती हो वे परिभोग की वस्तुएं कहलाती हैं। मर्यादाएं व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा हेतु आवश्यक है एवं इनसे हृदय की निर्मलता व पवित्रता भी बढ़ती है।
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