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उदयपुर में गणेश चतुर्थी पर दूधिया गणेशजी को कृष्ण के रूप में सजाया गया। प्राचीन बोहरा गणेश जी मंदिर में भी भगवान को 21 किलो सोने से शृंगार किया गया।

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दूधतलाई स्थित पाला गणेशजी को मेवाड़ी पगड़ी पहनाई गई और हाथी के चित्रों वाली कपड़े की पोशाक धारण कराई गई। इसी तरह शहर के अन्य गणेश मंदिरों में सुबह से देर शाम तक विभिन्न पूजा-अनुष्ठान हुए। सुबह से शाम तक मंदिरों में दर्शन को भारी भीड़ रही।

इस अवसर पर मंदिरों को फूलों और जगमग रोशनी से सुंदर सजाया गया। शहर के प्रमुख बोहरा गणेशजी मंदिर में मेला भराया गया। जहां साजो-सामान सहित ​महिलाओं के शृंगार की स्टॉल्स लगी और बच्चों के लिए झूले भी लगे। इसके अलावा शहर में जगह-जगह पांंडाल में गणपति की स्थापना की गई।

बोहरा गणेशजी को चांदी जड़ित पोशाक धारण कराई। वहीं, करीब 21 से 25 किलो स्वर्ण आभूषण पहनाए।

बोहरा गणेशजी को चांदी जड़ित पोशाक धारण कराई। वहीं, करीब 21 से 25 किलो स्वर्ण आभूषण पहनाए।

जाडा, पाला, दूधिया गणेश मंदिर में भीड़

शहर में बोहरा गणेशजी के अलावा जाड़ा गणेशजी, पाला गणेशजी और दूधिया गणेशजी मंदिर प्रमुख है। बापू बाजार में उदयपुर चा राजा के रूप में और धानमंडी में ​विशाल गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई है। जिन्हें मन्नत वाले राजा नाम दिया है। इसके अलावा शहर में जगह-जगह पांडाल सजाए गए हैं।

बोहरा गणेशजी मंदिर परिसर में दर्शन को आए भक्तों की खचाखच भीड़।

बोहरा गणेशजी मंदिर परिसर में दर्शन को आए भक्तों की खचाखच भीड़।

दूधतलाई रोड पर करीब 400 साल पुराने पाला गणेशजी मंदिर में भगवान गणेश जी को मेवाड़ पगड़ी पहनाई गई

दूधतलाई रोड पर करीब 400 साल पुराने पाला गणेशजी मंदिर में भगवान गणेश जी को मेवाड़ पगड़ी पहनाई गई



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