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रामगढ़ बांध को भरने के लिए ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश कराने का पहला प्रयास मंगलवार को असफल रहा। कृषि विभाग के सहयोग से शुरू किए गए देश के पहले ड्रोन-बेस्ड क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट का यह पहला ट्रायल था, जिसे देखने हजारों की संख्या में लोग बांध क्षेत्र
भीड़ से GPS फेल, इसलिए नहीं उड़ा ड्रोन
इस प्रोजेक्ट में ‘हाइड्रो ट्रेस’ नामक एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो रियल टाइम डेटा, सैटेलाइट इमेजिंग और सेंसर नेटवर्क की मदद से बारिश के अनुकूल बादलों को टारगेट करता है। ट्रायल के दौरान ज्यादा भीड़ होने से जीपीएस सिग्नल बाधित हो गया, जिससे ड्रोन नियोजित ऊंचाई तक भी नहीं पहुंच पाया। कंपनी ने कहा कि भीड़ ने टेक्निकल सेटअप को प्रभावित किया।
प्रशासन ने नहीं किया क्राउड कंट्रोल, जाम
ड्रोन से कृत्रिम बारिश देखने हजारों लोग बांध क्षेत्र में पहुंच गए। लोग आस-पास की पहाड़ियों, दीवारों, बिल्डिंगों और पुराने पंप हाउस तक पर चढ़ गए। इस कारण करीब पांच किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके, एंबुलेंस और सार्वजनिक बसें घंटों फंसी रहीं। पुलिस को कई बार हल्का बल प्रयोग कर भीड़ हटानी पड़ी। वैज्ञानिक बार-बार अनुरोध करते रहे कि भीड़ पीछे हटे, लेकिन भीड़ हटाने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा।
दो महीने तक चलेगा ट्रायल
पहला प्रयास असफल रहा, लेकिन कंपनी और सरकार का दावा है कि अगले दो महीने तक लगातार ट्रायल किए जाएंगे। ऐसा मानना है कि तकनीकी और प्रबंधन में सुधार कर इस प्रयोग को सफल बनाया जा सकता है। पहले ये प्रयोग 31 जुलाई को होना था, लेकिन भारी बारिश की चेतावनी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
पूजा-अर्चना से शुरू: शुरुआत से पहले कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा व विधायक महेन्द्रपाल मीणा ने विधिवत पूजा-अर्चना की। मंत्री ने सभा में इसे देश का पहला ड्रोन आधारित क्लाउड सीडिंग प्रयोग बताते हुए कहा था कि अगर यह सफल हुआ तो अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
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