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प्रतापगढ़ में बालश्रम और मानव तस्करी का एक मामला सामने आया है। स्थानीय स्वयं सेवी संगठन गायत्री सेवा संस्थान की सतर्कता से तीन जनजाति बच्चों को गडरियों के चंगुल से मुक्त कराया गया है।
गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल ने फील्ड विजिट के दौरान यह मामला पकड़ा। उन्होंने देखा कि तीन अलग-अलग गडरिया समूह भेड़ें चरा रहे थे। इन भेड़ों की देखभाल तीन छोटे बच्चे कर रहे थे। मेघवाल ने तुरंत पुलिस को सूचित किया।
जांच में पता चला कि तीनों बच्चे उदयपुर संभाग के अलग-अलग जिलों से हैं। आरोपी इन बच्चों को एडवांस पैसे देकर बंधुआ मजदूरी करवा रहे थे। पुलिस ने भूराराम, गुराराम और नैनाराम गडरिया के खिलाफ मामला दर्ज किया है। श्रम विभाग के प्रतिनिधि विक्रम सिंह ने बच्चों के बयान दर्ज किए हैं।
कुछ वर्ष पहले भी ऐसी शिकायतें मिली थीं। तब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राजस्थान बाल आयोग ने जांच टीम बनाई थी। तत्कालीन राष्ट्रीय बाल आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने पाली के बाली पंचायत समिति में 2000 से अधिक समुदाय प्रतिनिधियों से संवाद किया था। रेबारी, रायका और गडरिया समुदाय के संगठनों से बालश्रम करवाने वालों की पहचान करने की अपील की गई थी।
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