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हाईकोर्ट ने करीब 7 साल बाद चयनित आरएएस अधिकारी की मैरिट कम करने के मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राज्य सरकार से जवाब मांगा हैं। जस्टिस मनीष शर्मा की अदालत ने यह आदेश आरएएस पदमा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हिमांशु ठोलिया ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने आरएएस-2018 की भर्ती में मैरिट में 24वां स्थान प्राप्त किया था। लेकिन करीब 7 साल बाद आरपीएससी ने उसे 1 मई को नोटिस भेजकर कहा कि उसे उत्तरपुस्तिका में एक प्रश्न पर परीक्षक ने एक जगह जीरो और एक जगह सात अंक दिए हैं। जिसका वह स्पष्टीकरण पेश करें।

इसके जवाब में प्रार्थिया ने कहा कि परीक्षक के अंकों के मामले में वह जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन आरपीएससी ने 10 जून को उसकी मैरिट बदलते हुए 24 से 39ए कर दी। जिससे वह अपने ही बैच के 14 आरएएस अफसरों से जूनियर हो गई। जबकि प्रार्थियां को परवीक्षा काल पूरा करने के बाद स्थायी भी कर दिया गया हैं और वह वर्तमान में एसडीएम अजमेर के पद पर कार्यरत हैं।

हमने कोर्ट से कहा कि नियमानुसार अंकों की पुन गणना हो सकती है, लेकिन उत्तपुस्तिका की पुन जांच नहीं की जा सकती हैं।



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