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राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के सरकारी आवासों में नियम विरूद्ध रह रहे कार्मिकों की जानकारी मांगी हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह आदेश यूनिवर्सिटी कर्मचारी सुभाष राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को निर्देश दिए है कि वह तय समयावधि के बाद भी यूनिवर्सिटी के आवासों को खाली नही करने वाले कार्मिकों की जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करें।
वहीं शपथ पत्र में यह भी बताए कि क्या ऐसे कर्मचारियों से आवास खाली कराने अथवा पेलेन्टी वसूलने के लिए नोटिस जारी किए गए है या नहीं?
पेलेन्टी रजिस्ट्रार की सेलेरी से वसूली जाएगी कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे कर्मचारियों पर कोई एक्शन नही लिया जाता है तो पेलेन्टी की समस्त राशि रजिस्ट्रार की सेलेरी से वूसल की जाएगी। अदालत ने निर्देशों की पालना के लिए 30 दिन का समय दिया हैं। वहीं मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को तय की हैं।
लिपिक पर लगाई थी डेढ़ लाख की पेलेन्टी दरअसल, यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ने याचिकाकर्ता पर आवास खाली नहीं करने पर डेढ़ लाख की पेलेन्टी लगाई थी। जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि उसके खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन भेदभाव पूर्ण कार्रवाई कर रहा है।
यूनिवर्सिटी के आवासों में कई कर्मचारी और अधिकारी नियत समयावधि के बाद भी रह रहे है। लेकिन रजिस्ट्रार ने केवल उसके खिलाफ ही पेलेन्टी की कार्रवाई की हैं। जबकि आवास आवंटित होने के बाद से उसे नियमों के तहत एचआरए नहीं दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता को 28 सितंबर 2022 को यूनिवर्सिटी परिसर में डी-9 आवास एक साल के लिए आवंटित हुआ था।
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