तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस इंडियन सोसाइटी फॉर हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांटेशन (इनश्ल्ट 2025) रविवार को संपन्न हुई
तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस इंडियन सोसाइटी फॉर हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांटेशन (इनश्ल्ट 2025) रविवार को संपन्न हुई, जहां विशेषज्ञों नई तकनीकों की जानकारी को शेयर की। एक्सपर्ट ने कहा कि अब दिल के गंभीर रूप से कमजोर हो जाने पर मरीज की जिन्दगी को थमने

तीसरे दिन डॉ. अंकित मित्तल ने ट्रांसप्लांट रेसिपिएंट को सुरक्षित रखने के उपायों पर चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. अजीत बाना (कार्डियक), डॉ. वीरेन्द्र सिंह (पल्मोनरी) और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राजकुमार यादव ने बताया कि तीसरे दिन डॉ. अंकित मित्तल ने ट्रांसप्लांट रेसिपिएंट को सुरक्षित रखने के उपायों, डॉ. रविकांत पोरवाल ने हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट के मरीजों में टीबी होने पर उसके इलाज पर, डॉ. सुलेखा सक्सेना ने एकमो तकनीक पर अपनी रिसर्च साझा की।

डॉ. रविकांत पोरवाल ने हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट के मरीजों में टीबी होने पर उसके इलाज पर, डॉ. सुलेखा सक्सेना ने एकमो तकनीक पर अपनी रिसर्च साझा की।
वहीं, “लर्न फ्रॉम द मास्टर्स” शीर्षक से हुए सत्रों में डॉ. मिलिंद, डॉ. जसलीन कुकरेजा, डॉ. ए.जी.के. गोखले और डॉ. अरविंद कुमार ने हार्ट व लंग ट्रांसप्लांट की सर्जिकल तकनीकें वीडियो लेक्चर के माध्यम से साझा कीं। डॉ. के.आर बालाकृष्णन ने पेडियाट्रिक लोबार लंग ट्रांसप्लांट पर, जबकि डॉ. बाला गोविनी ने ब्रोंकियल एनास्टोमोटिक तकनीक पर चर्चा की।
हैदराबाद के पद्मश्री अवॉर्ड डॉ. गोपाल कृष्ण गोखले ने बताया कि यह तकनीक उन मरीजों में लगाई जाती है जिन्हें एडवांस हार्ट फेल्योर है और जिन पर दवाओं का असर नहीं हो रहा। कई बार इसे हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा के दौरान ‘ब्रिज टू ट्रांसप्लांट’ के रूप में लगाया जाता है, जबकि कुछ मामलों में यह स्थायी सहारा भी बन जाती है।
एलवेड लगाने के बाद मरीजों में सांस फूलना, थकान और सूजन जैसी परेशानियां कम होती हैं तथा उनकी जीवन गुणवत्ता में काफी सुधार देखा गया है। ट्रेजरार डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के दौरान ईसीएमओ रजिस्ट्री, ट्रांसप्लांट इन्फेक्शियस डिज़ीज़, रिहैबिलिटेशन और स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़ पर वर्कशॉप भी आयोजित की गई। हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट की सर्जिकल तकनीक पर व्याख्यान हुए। वहीं सिंगापुर से आए डॉ. शिवासतन ने एनिमल हार्ट पर एल्वेड इंप्लांट का लाइव डेमो दिया।
अमेरिका से आईं डॉ. कैमिली कॉटन और डॉ. प्रसिला रूपाली ट्रांसप्लांट के बाद होने वाले इन्फेक्शन की रोकथाम और इलाज के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि अब हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट के मरीजों में संक्रमण (इन्फेक्शन) को होने से पहले ही पहचाना जा सकेगा। इसके लिए ऐसी नई मॉलिक्युलर डायग्नोस्टिक किट विकसित की है जो संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही उसके जीवाणु या वायरस की मौजूदगी को पहचान लेती है। इससे संक्रमण को फैलने से पहले नियंत्रित किया जा सकता है और ट्रांसप्लांट फेल होने का जोखिम काफी घट जाता है। यह तकनीक मरीज के रक्त या श्वसन नमूने से माइक्रोबियल डीएनए और आरएनए का विश्लेषण करती है। इससे यह पता चलता है कि कौन-सा संक्रमण पनपने की स्थिति में है। सिर्फ तीन से चार घंटों में ही इसकी रिपोर्ट आ जाती है।
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