जाेधपुर के नांदड़ी के रहने वाले रूपचंद मजदूरी करते हैं। परिवार में पांच सदस्य हैं। 4 पंखे, 1 कूलर, 4 से 5 एलईडी बल्ब, फ्रिज, पानी की मोटर है। इस महीने का बिजली बिल 9 लाख 7 हजार 551 रुपए आया है।
इसी इलाके में रहने वाले प्रदीप आचार्य भी पेशे से मजदूर हैं। कनेक्शन पिता रामनिवास आचार्य के नाम से है। उनका बिजली का बिल 7 लाख रुपए आया है। घर में दो पंखे, एक कूलर व फ्रिज है।
इलाके के समीर के घर में 2 एसी, 2 पंखे, 5 एलईडी बल्ब, फ्रिज व पानी की मोटर है। समीर के घर इस महीने बिजली का बिल 45 हजार रुपए आया है।
तीनों में एक बात कॉमन है- तीनों के घर में हाल ही में स्मार्ट मीटर लगे हैं। वे बढ़े हुए बिल के लिए स्मार्ट मीटर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं डिस्कॉम एमडी भंवरलाल का दावा है कि लोगों का बिजली कंजप्शन ज्यादा है, इसलिए बिल ज्यादा आया है।
सच जानने के लिए भास्कर ने मामले की पड़ताल की…

रूपचंद और प्रदीप आचार्य का अगस्त महीने का लाखों रुपए का बिजली बिल आया है, जबकि दोनों के घरों में सामान्य उपकरण हैं।
डिस्कॉम का ज्यादा खपत का दावा कितना मजबूत… डिस्कॉम का दावा है कि खपत ज्यादा होने के कारण बिजली बिल ज्यादा आया है। इस दावे की पड़ताल के लिए भास्कर ने उन उपभोक्ताओं के पिछले कुछ महीने के बिजली बिल की पड़ताल की, जिनके स्मार्ट मीटर लगने के बाद ज्यादा बिल आया है।
इस बार 9 लाख, पहले 3 हजार तक आता था बिल रूपचंद का इस बार 9 लाख रुपए से ज्यादा का बिल आया है। उनके पिछले बिजली बिलों की बात करें तो जून में 2 हजार 282 रुपए, मई में 2 हजार 875 रुपए, अप्रैल में 2886, मार्च माह में 670 रुपए और फरवरी माह में 5452 रुपए का बिल बना था।

ये रूपचंद का पांच महीने का बिजली बिल का ब्योरा है। अगस्त से पहले ढाई से तीन हजार के बीच बिजली बिल है। मार्च में तो बिजली बिल की राशि महज 670 रुपए थी।
इस बार 7 लाख, पहले 2 हजार का बिल प्रदीप आचार्य का अगस्त में 7 लाख 13 हजार 484 रुपए का बिल आया। इससे पहले जून में 1500 और मई में दो हजार रुपए का बिजली बिल आया था।
80 से 90 घरों में शिकायत हाल ही में जोधपुर के बनाड़ क्षेत्र के नांदड़ी इलाका, नांदडी सब डिवीजन से जोधपुर डिस्कॉम ने स्मार्ट मीटर लगाना शुरू किया। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद आए बढ़े हुए बिल ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। भास्कर ने जब क्षेत्र में पड़ताल की तो 80 से 90 घरों में शिकायत सामने आई।
- 5 घरों में 1 लाख रुपए से अधिक का बिल आया।
- 10 घरों में 45 से 50 हजार रुपए का बिल आया।
- 30 घरों में 10 हजार से 30 हजार के बीच बिल बना।
- 50 घरों में पांच से 10 हजार के बीच बिल आया है।
प्रदेश में लगे 5 लाख से अधिक मीटर राजस्थान में 4 अप्रैल से राज्य सरकार व केंद्र सरकार की सहभागिता से क्रियान्वित आरडीएसएस योजना के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है। अब तक प्रदेश के तीनों डिस्कॉम में 5 लाख 5 हजार के करीब स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बढ़े हुए बिल की शिकायतों के आंकड़ों के बारे में जब डिस्कॉम से बात की तो सामने आया कि इस तरह का आंकड़ा अभी तक कम्पाइल नहीं किया गया हैं।

बिजली बिल की बढ़ी हुई राशि के विरोध में इलाके के लोगों ने कलेक्टर को भी ज्ञापन दिया।
नहीं कर पा रहे शिकायत यह भी सामने आया है कि स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, लेकिन उससे संबंधित मोबाइल ऐप अभी एक्टिव नहीं हैं। ऐसे में कंज्यूमर मोबाइल ऐप में या कस्टमर केयर जैसे ऑप्शन पर शिकायत नहीं कर पा रहे। संबंधित एईएन ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं।
ऐप को लेकर दावा किया गया था कि इससे ये भी जान सकेंगे कि कौन सा इक्यूपमेंट बिजली की कितनी खपत कर रहा है…ये भी उपभोक्ता नहीं जान पा रहे हैं।
मनवीय भूल के कारण हुई गड़बड़ी जोधपुर डिस्कॉम के एमडी आईएएस भंवर लाल ने बताया कि स्मार्ट मीटर नई टेक्नॉलोजी के साथ आगे बढ़ रही है। निगम और उपभोक्ता दोनों को इसका फायदा मिलेगा।
बढ़े हुए बिल की शिकायत मीटर की वजह से नहीं बल्कि ह्यूमन एरर (मानवीय भूल) के कारण सामने आई है। कई बार रीडिंग के समय यूनिट सही नहीं लिखने के कारण एक साथ ज्यादा बिल आने की आशंका रहती हैं। कंज्यूमर के डाउट को क्लियर करने के लिए चेक मीटर साथ में लगाने के निर्देश दिए हैं। यानि दो मीटर इंस्टॉल करेंगे एक स्मार्ट रहेगा दूसरा उसके पैरेलल डिजिटल मीटर लगाया जाएगा। दोनों की रीडिंग चेक की जाएगी।
बिल आने के बाद 80 से 90 शिकायतें आई हैं, जिसका समाधान किया जा रहा है। गड़बड़ी के कारण ज्यादा बिल आया है। स्मार्ट मीटर फास्ट चलना इसकी वजह नहीं है।

बिजली बिलों को लेकर लोग लगातार विरोध जता रहे हैं। इसके लिए स्मार्ट मीटर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
एक्सपर्ट बोले- ऐप एक्टिव करने की जरूरत पूर्व चीफ इंजीनियर जोधपुर डिस्कॉम एमएस चारण ने बताया कि पहले के मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर में टेक्नाेलॉजी अपडेट हुई है। ऐसे में मीटर तेज चलना संभव नहीं। हालांकि कुछ मीटर में खामी हो सकती है तो उसे चेक मीटर के साथ लगाने से सही हो सकता है। कंपनी ने मीटर लगा दिए लेकिन ऐप एक्टिव नहीं किया। ऐसे में कंज्यूमर मोबाइल पर अपने कंजप्शन को चेक नहीं कर पा रहे। कंपनी मीटर के साथ ऐप भी एक्टिव कर दे तो गलती का चांस खत्म हो जाएगा और ग्राहक भी संतुष्ट होगा।
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