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बाजार में सोयाबीन तेल के दाम भले स्थिर दिख रहे हों, लेकिन असलियत में उपभोक्ताओं की जेब पर पहले से ज्यादा बोझ बढ़ गया है। कंपनियों ने अब एक लीटर तेल पाउच देना लगभग बंद कर दिया है। दुकानों में 650, 750, 800 और 850 ग्राम तक के पैक मिल रहे हैं।
ग्राहक इसे पूरा लीटर मानकर खरीद रहा है, लेकिन असल में उसे कम तेल मिल रहा है। तेल कंपनियों ने धीरे-धीरे एक ऐसा सिस्टम बना दिया है जिसमें ग्राहक को पता ही नहीं चलता कि वह कितना नुकसान उठा रहा है। एक ओर महंगाई की मार है, दूसरी ओर न केवल कम तेल मिल रहा है, बल्कि हर खरीद में 10 से 200 रुपए तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। जबकि खाद्य तेल के पैक साइज के मानक मापदंड तय है। मगर कंपनियों ने इन्हें दरकिनार करते हुए अपने हिसाब से पैक साइज तय कर लिए हैं। अधिकारियों का इस पर ध्यान नहीं है।
बाजार में करीबन हर ब्रांड के तेल पाउच एक लीटर में नहीं मिलकर 750 ग्राम में ही आ रहे हैं। कुछ 740 ग्राम व 840 ग्राम के पाउच भी मिल रहे हैं। जबकि कोई भी ब्रांड पूरा एक लीटर (910 ग्राम) तेल नहीं दे रहा। ग्राहक इसे एक लीटर समझकर ही खरीद रहे हैं। वास्तव में उन्हें प्रति लीटर 50 से 350 ग्राम तक कम तेल मिल रहा है।
दुकानदार बताते हैं कि एक बार सोयाबीन के भाव 8000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। उस समय तेल का भाव वही रखने के बहाने वजन घटा दिया था। ताकि ग्राहकों को ज्यादा फर्क महसूस न हो। उसके बाद सोयाबीन के दाम आधे भी हुए लेकिन तेल का वजन नहीं बढ़ाया। 15 लीटर के डिब्बे का भी इसी तरह वजन घटा रखा है। 13.650 किलो तेल मिल रहा है। ग्राहक को करीब 1.350 किलो तेल कम मिल रहा है, जबकि कीमत उतनी ही ली जा रही है।
मंत्री बोले-अभियान चलाकर कंपनियों को पाबंद करेंगे
नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि जो भी कंपनियां इस प्रकार से कर रही है, उनको उचित दिशा-निर्देश देने के साथ ही पाबंद करेंगे। साथ ही उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए भी अभियान शुरू करवाएंगे। इस दौरान बताएंगे कि लीटर की मात्रा के हिसाब से तेल खरीदें। पैक पर 1 लीटर लिखा है तो ठीक, अन्यथा तेल पूरा नहीं होगा। ऐसी गड़बड़ियों की शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग या माप-तौल विभाग में दर्ज करानी चाहिए।
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