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हाईकोर्ट ने डमी स्कूल और कोचिंग संस्थान के गठबंधन को वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कलंक बताया हैं। जस्टिस अनूप ढंढ़ की अदालत ने यह टिप्पणी कोटा की दो निजी स्कूलों और उनके छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।
अदालत ने सीबीएसई, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि वह एसआईटी गठित करके स्कूल और कोचिंग संस्थान का औचक निरीक्षण करें। वहीं अगर स्कूल में स्टूडेंट्स गैर हाजिर मिले और उसी समय कोचिंग संस्थान में पढ़ रहे हो तो दोनों संस्थानों पर कार्रवाई करें।
शिक्षा बिजनस बनकर रह गई है अदालत ने कहा कि आज प्रदेश में अनेक ऐसे स्कूल है, जो 9वीं से 12वीं के स्टूडेंट्स को डमी प्रवेश देते हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को नियमित आने की जरूरत नहीं होती हैं। जबकि वे विद्यार्थी स्कूल समय में कोचिंग सेंटर में नीट, जेईई की पढ़ाई करते हैं।
अदालत ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों की मर्जी भी शामिल होती हैं। ऐसे में आज के समय शिक्षा इन स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के लिए केवल बिजनस बनकर रह गई हैं। डमी स्कूल और कोचिंग संस्थानों का यह गठबंधन शिक्षा प्रणाली के लिए कलंक के समान हैं।
अभिभावक अपने बच्चों पर इच्छाएं नहीं थोपे अदालत ने कहा कि आज जितने स्टूडेंट नीट और जेईई की तैयारी कर रहे हैं। उतनी संख्या में सीटें उपलब्ध नहीं है, ऐसे में सभी का चयन संभव नहीं है। इसलिए अभिभावकों को भी डॉक्टर-इंजीनियर बनने की इच्छा स्टूडेंट्स पर थोपने की जगह उन्हें अपना करियर चुनने की आजादी देनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यह सही समय है, जब शिक्षा बोर्ड इस मुद्दे पर गौर करे और सख्त नियम बनाए, जिसमें कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए नियमित उपस्थिति जरूरी हो।
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