![]()
फर्म ने जहां पता बताया, वहां खाली प्लॉट।
उदयपुर के डाक मंडल कार्यालय में विभाग के कर्मचारी डमी फर्में बनाकर केवल कागजों में खरीद कर रहे हैं। अनुडाकपाल नरेश नागदा ने अपने रिश्तेदार के नाम पर प्रतीक इंटरप्राइज और अकाउंटेंट विक्रम बिश्नोई ने उदयपुर इंटरप्राजेज और डेनेस्टी इंटरप्राजेज के नाम से
हर महीने लाखों रुपए के कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, पेन फर्नीचर समेत तमाम चीजों की खरीद बताई जा रही है। 18 फरवरी 2025 को 20 प्रिंटर की स्वीकृति निकाली, लेकिन प्रिंटर ऑफिस में आए ही नहीं, उससे पहले ही 20 फरवरी को 4.77 लाख का भुगतान उदयपुर इंटरप्राइजेज को कर दिया। जब पुराने प्रिंटर खराब हुए, तो इस बात का खुलासा हुआ कि पहले भुगतान किए हुए प्रिंटर पहुंचे ही नहीं, उसके बाद आनन-फानन में बाजार से प्रिंटर खरीदे। इसी तरह 29 मार्च-25 को एक ही दिन में प्रतीक इंटरप्राइज और उदयपुर इंटरप्राजेज को 9-9 चेक के जरिए 4.43 लाख का भुगतान कर दिया। जबकि इस राशि से बताए आईटम फिंगर प्रिंट स्कैनर, की-बोर्ड, प्रिंटर अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान सप्लाई ही नहीं हुआ। इसी तरह 31 मार्च-2024 को 7 चेक उदयपुर एंटरप्राइजेज के नाम से 6.12 लाख का भुगतान कर दिया और सामान सप्लाई भी नहीं हुआ।
- खास बात यह है कि डाक विभाग ने उदयपुर इंटरप्राइेजज से 20 प्रिंटर खरीदना बताया। इसका भुगतान भी प्रति प्रिंटर 26,500 इसी फर्म को किया गया। बिना सप्लाई भुगतान का खुलासा हुआ तो आनन-फानन में जयपुर इनग्राम कंपनी से 16 हजार में ऑनलाइन मिल रहे प्रिंटर की ही खरीद 26500 रुपए प्रति प्रिंटर बताई। यानी बिना सप्लाई के पहले 4.77 लाख रुपए का गबन कर दिया। इसके बाद 1.83 लाख के फिर खरीदे। खास बात यह है कि डाक विभाग के अधीक्षक अक्षय भानुदास भी धड़ल्ले से स्वीकृति दे रहे हैं।
- अधिकारियों ने 28 मार्च-25 को अंनब्रांडेंड सामान के भुगतान की स्वीकृति दी, जबकि बिल भी नहीं आया था।
- फर्म ने बिल 29 मार्च-25 को दिया। उससे पहले भुगतान कर दिया।
- फर्म को एक ही दिन में करीब 18 चेक से भुगतान।
10 किमी दूर पंप से विभाग की गाड़ियों में डीजल भरवा रहे, 2 लाख एंडवास दे रहे
डाक विभाग के अधीक्षक अक्षय भानूदास के आने से पहले पास में ही स्थित पेट्रोल पंप से गाड़ियों में डीजल भरवाया जाता था। जिसमें ड्राइवर नकद भुगतान कर पंप से रसीद प्राप्त की जाती थी, लेकिन अब अधिकारी के कमशीन के चलते डीजल केवल पानेरियों की मादड़ी के पेट्रोल पंप से भरवाने के मौखिक आदेश दे दिए, जो डाक विभाग के कार्यालय से ही 10-11 किमी दूर है। साथ ही पेट्रोल पंप को भी हर महीने 2-4 लाख एडंवास भुगतान किया जा रहा है। जिसके बाद मनमर्जी से बिलिंग कर रहे हैं।
बिना डिमांड के ही खरीद हो रही है
विभाग में छोटे कार्यालयों द्वारा किसी तरह के आइटम की डिमांड भी नहीं होती, उसके बावजूद भी इन कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम बनी फर्मों से अधिकारी सीधे खरीद कर रहे हैं। कई मामलों में वस्तुओं की आपूर्ति का कोई प्रमाण नहीं है, न तो स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि है और न ही प्राप्ति रसीद। फिर भी भुगतान हो जाता है। साथ ही खरीदारी को जानबूझकर 25,000 या 2.5 लाख की सीमा के भीतर रखा गया ताकि ओपन बिडिंग से बचा जा सके। अपने बिना टेंडर के रिश्तेदारों की फर्मों से खरीद कर सके। डाक विभाग मंडल, उदयपुर अधीक्षक अक्षय भानुदास का कहना है कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं हैं। मैं कुछ नहीं बता सकता।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments