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पुणे में आयोजित पुणे फाउंटेन पेन शो 2025 का इस बार राष्ट्रीय स्तर पर भव्य आयोजन किया गया।

पुणे में आयोजित पुणे फाउंटेन पेन शो 2025 का इस बार राष्ट्रीय स्तर पर भव्य आयोजन किया गया। देशभर से फाउंटेन पेन निर्माता और संग्रहकर्ता इस अनूठे शो में शामिल हुए। शो का उद्घाटन जयपुर के डॉ. विवेक शर्मा ने गेस्ट ऑफ हॉनर के रूप में दीप प्रज्वलित कर किया

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इस अवसर पर महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दिलीप कार्णिक मुख्य अतिथि रहे। आयोजन में विभिन्न पेन निर्माताओं ने अपनी कारीगरी और कलेक्शन प्रदर्शित किए, वहीं संग्रहकर्ताओं ने दुर्लभ और ऐतिहासिक पेन पेश कर दर्शकों को आकर्षित किया।

इस अवसर पर महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दिलीप कार्णिक मुख्य अतिथि रहे।

इस अवसर पर महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दिलीप कार्णिक मुख्य अतिथि रहे।

डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि यह शो न सिर्फ पेन प्रेमियों को जोड़ता है बल्कि लेखन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का भी कार्य करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी पेन की खूबसूरती और महत्व कम नहीं हुआ है। फाउंटेन पेन एक कला है, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसकी सोच को दर्शाती है।

आयोजकों के मुताबिक, यह पेन शो देशभर में फाउंटेन पेन की परंपरा को संजोने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का एक अहम प्रयास है। गौरतबल है कि डॉ. विवेक शर्मा भारत के प्रमुख फाउंटेन पेन कलेक्टर्स में गिने जाते हैं। 450 से अधिक किस्म के फाउंटेन पेन डॉ. विवेक शर्मा के पास इस समय लगभग 450 से अधिक फाउंटेन पेन, 150 तरह की स्याही, 9 एंटीक कलमें और 150 तरह की पेन की निब मौजूद हैं। उनका यह सफर वर्ष 1978 में शुरू हुआ, जब उन्होंने महज 1 रुपया 20 पैसे में अपना पहला फाउंटेन पेन खरीदा था। उस समय वह छठी कक्षा में पढ़ते थे और यह पेन आज भी उनके संग्रह में पूरी तरह सुरक्षित है। यही वह शुरुआती बिंदु था, जब पेन के प्रति उनका लगाव धीरे-धीरे जुनून में बदलता चला गया।

शो का उद्घाटन जयपुर के डॉ. विवेक शर्मा ने गेस्ट ऑफ हॉनर के रूप में दीप प्रज्वलित कर किया।

शो का उद्घाटन जयपुर के डॉ. विवेक शर्मा ने गेस्ट ऑफ हॉनर के रूप में दीप प्रज्वलित कर किया।

4 पीढ़ियों में बांटे हैं पेन डॉ. विवेक ने बताया कि बीते 80 वर्षों में फाउंटेन पेन की बनावट और इंक भरने की प्रक्रिया में कई बदलाव आए हैं। वे इन पेनों को चार पीढ़ियों में बांटते हैं। सबसे पहली पीढ़ी में टंकी खोलकर स्याही भरने वाला पेन था, इसके बाद सेक्शन से भरने वाला पेन आया, फिर तीसरी पीढ़ी में पीछे से वैक्यूम क्रिएट कर इंक भरने वाले पेन लोकप्रिय हुए और अब चौथी पीढ़ी में रेडीमेड इंक कार्ट्रिज वाले फाउंटेन पेन उपलब्ध हैं। उनके कलेक्शन में फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, इंग्लैंड, तुर्की, चीन जैसे करीब एक दर्जन से अधिक देशों के पेन शामिल हैं।

संग्रहकर्ताओं ने दुर्लभ और ऐतिहासिक पेन पेश कर दर्शकों को आकर्षित किया।

संग्रहकर्ताओं ने दुर्लभ और ऐतिहासिक पेन पेश कर दर्शकों को आकर्षित किया।

इस कलेक्शन में मोंटब्लैंक, पार्कर, पायलट, शैफर, वॉटरमैन, हीरो, और सेलर जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स शामिल हैं। खास बात यह है कि उनके पास ब्रिटिश कालीन दुर्लभ इंडियन ब्रांड्स भी हैं, जैसे विल्सन, अरुण, लिंक, और गुना पेन। वे न केवल मॉडर्न लिमिटेड एडिशन पेन रखते हैं, बल्कि 100 साल पुराने विंटेज पेन भी उनके संग्रह का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि पेन सिर्फ लेखन का साधन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है, जो इंसान के व्यक्तित्व और उसकी सोच को दर्शाता है।



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