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पाली जिले के प्रतापगढ़ (सोमेसर) गांव की रहने वाले बसंती सीरवी का RPF में सब इंस्पेक्टर में सलेक्शन हुआ। गांव पहुंचने पर परिवार और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया।

बेटी को बाहर पढ़ने भेजा तो लोगों ने ताने दिए, कहा- इतना पढ़ा कर क्या करना है आगे रोटियां ही तो बनानी है। लेकिन, जब बेटी का RPF सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हुआ तो वही लोग आज उसे बधाइयां दे रहे हैं, मालाएं लेकर आए हैं और मिठाई खिला रहे हैं।

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ये है 5 बच्चों की मां का बयान, जिन्होंने अपनी एक बेटी को पति की मौत के बाद पढ़ने बाहर भेजा तो गांव वालों परिचितों ने डराया। लेकिन उन्हें बिटिया पर विश्वास था। आज परिणाम सबके सामने हैं।

ये कहानी है- पाली के छोटे से गांव प्रतापगढ़ (सोमेसर) की रहने वाली 25 साल की बसंती सीरवी की। जिनका RPF में सब इंस्पेक्टर के पद पर सिलेक्शन हुआ। परिवार का दावा है कि बसंती अपने गांव की पहली लड़की है जिसका RPF में सिलेक्शन हुआ है।

रिजल्ट आने के बाद जब वे गांव पहुंची तो उनके स्वागत में परिवार के लोगों के साथ ग्रामीण भी शामिल थे। ट्रेन से उतरते ही बसंती का माला पहना कर स्वागत किया गया। ढोल बजाए गए।

जब ग्रामीणों ने कहा- बेटी तुमने तो गांव का नाम रोशन कर दिया। ये सुनकर बसंती की आंखें नम हो गई।

बसंती बताती है- पिता वक्ताराम किसान थे और साल 2014 में उनका निधन हो गया था। इसके बाद हम 5 भाई-बहनों की जिम्मेदारी मां नारायणी देवी के कंधों पर आ गई। ऐसे मुशिक्ल वक्त में भी मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने कॉलेज पढ़ने के लिए मुझे जोधपुर भेजा।

उस समय उनकी मां को कुछ रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने टोका कि बेटी को अकेला कहां रहने भेज रही हो। आगे चलकर तो उसे रोटियां ही बनानी है फिर इतना क्यों पढ़ा रही हो। कुछ हो गया तो। लेकिन, मां ने किसी की नहीं सुनी और मुझे जोधपुर भेज दिया।

बसंत कहती हैं- यहां उन्होंने कॉम्पिटिशन एग्जाम कोचिंग ली और RPF में सब इंस्पेक्टर पद पर के लिए सिलेक्ट हुई।

इतनी आसान नहीं थी बसंती की राह

बसंती बताती हैं- गांव में लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने का चलन नहीं है। लेकिन उसने गांव छोड़कर जोधपुर में रहकर कॉलेज किया और फिर कोचिंग। मां और भाई के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था।

साल 2022 में कॉलेज पूरा कर लिया। उसके बाद 2024 तक जोधपुर में रहकर कोचिंग की और प्रतियोगी परीक्षा दी। एक-दो प्रतियोगी परीक्षा दी लेकिन कुछ नंबर से पीछे रह जाती थी। लेकिन फिर भी हार नहीं मानी। फिर जून 2024 को RPF में सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी। मार्च 2025 में लिखित परीक्षा का रिजल्ट आया। जुलाई 2025 में लखनऊ में फिजिकल टेस्ट हुआ। 12 सितम्बर 2025 को फाइन लिस्ट जारी हुई। 17 सितम्बर को गोवाहटी में मेडिकल हुआ। जिसमें पास हो गई। अब बसंती को ट्रेनिंग के लिए जाना। जिसकी डेट आने का इन्तजार है।

पांच भाई-बहन है

बसंती बताती है कि उसके पिता वक्ताराम खेती के साथ कारपेंटर का काम करते थे। वर्ष 2014 में पिता के देहांत के बाद परिवार को मां नारायणीदेवी ने संभाला। सबसे बड़ी बहन कमला, उससे छोटे भाई सकाराम सीरवी और बहन शांता की शादी हो रखी है। उससे एक छोटी बहन है संतोष जिसने नर्सिंग की है।बसंती ने आठवीं तक की पढ़ाई प्रतापगढ़ गांव में ही की। 9-10वीं की पढ़ाई निम्बाड़ा (पाली) में की। 10वीं में उसने 85 प्रतिशक अंक प्राप्त किए। गणित में 100में से 100 अंक हासिल किए थे। 11वीं-12वीं की पढ़ाई श्री आईजी बालिका विद्या पीठ जवाली से की। विज्ञान twelfth बोर्ड परीक्षा में उसने 82 प्रतिशत अंक हासिल किए। ग्रेजुएशन UG की शिक्षा लाचू मेमोरियल कॉलेज ऑफ सेंस एंड टेक्नोलॉजी जोधपु8र से ली। यूजी फाइनल डिग्री में 81 प्रतिशत अंक हासिल किए।

जोधपुर में रहकर की कोचिंग

परिजन बताते है कि बसंती ने SSC-CGL की तैयारी जोधपुर शहर में रहकर की। यहां उसने कोचिंग ली। जिसमें प्री-क्लियर हुआ लेकिन मेंस में कुछ मार्क से रह गई। उसके बाद भी हार नहीं मानी और रेलवे की सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी। जिसमें उसका सिलेक्शन हो गया। कुछ दिन बाद वह सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के लिए जाएगी।



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