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हाईकोर्ट ने पांच साल की भारतीय मूल की बच्ची की भारत में रहने की वीजा अवधि बिना मां की एनओसी के बढ़ाने के लिए कहा हैं। यह निर्देश जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने ऑस्ट्रेलिया में जन्मी 5 साल की सेहर गोगिया के मामले में दिया।

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अदालत ने कहा कि हम पांच साल की बच्ची को मां की दया के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। अगर बच्ची की भारत में रहने की वीजा अवधि नहीं बढ़ाई जाती है तो वह भारत में अवैध कहलाएगी।

कोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की मां से एनओसी लिए बिना वीजा अधिकतम अवधि के लिए बढ़ा दिया जाए। साथ ही, पिता को बालिका के ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड के लिए आवेदन की छूट दी।

कोर्ट ने आव्रजन ब्यूरो को आवेदन पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

बच्ची के माता-पिता भारतीय नागरिक, बच्ची ऑस्ट्रेलियन दरअसल, पांच साल की बच्ची सेहर गोगिया के माता-पिता भारतीय नागरिक हैं। उनका विवाह भी भारत में हुआ। लेकिन विवाह के बाद वह ऑस्ट्रेलिया चले गए। यहां 1 जून 2020 को सेहर का जन्म हुआ। इसके बाद 22 नवम्बर 2011 में बच्ची को ऑस्ट्रेलियन नागरिकता मिल गई।

अगस्त 2022 में बच्ची अपने माता-पिता के साथ भारत वापस आ गई। उसके पास अगस्त 2023 तक का वीजा था। बाद में उसे 24 जनवरी 2024 तक बढ़ा दिया गया। लेकिन इसके बाद बच्ची की मां ने वीजा बढ़ाने के लिए एनओसी देने से मना कर दिया।

बच्ची की ओर से उसके पिता ने याचिका दायर करके कहा कि भारत लौटने के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हो गया। दोनों अलग रहने लगे, लेकिन बच्ची शुरू से उसके साथ हैं। उसने बच्ची के वीजा को बढ़ाने के लिए आवेदन किया। लेकिन उसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि बच्ची की मां ने इसके लिए एनओसी नहीं दी।

केन्द्र सरकार नागरिकता कानूनों पर पुनर्विचार करें अदालत ने कहा कि केन्द्र सरकार ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता भारतीय नागरिक हैं और उनका जन्म विदेश में हुआ हैं। ऐसे बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के उपायों पर विचार करें। वहीं सरकार को नागरिकता कानूनों पर पुनर्विचार भी करना चाहिए।

अदालत ने संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि (यूएनसीआरसी) का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और उसे कानूनी रूप से आवश्यक होने पर ही माता-पिता से अलग करना उचित है। कोर्ट ने नागरिकता कानूनों की समीक्षा करने पर जोर दिया, वहीं संयुक्त राष्ट्र व यूनिसेफ से जुड़े 190 देशों के अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे में सहयोग बढ़ाने और बच्चों की बेहतरी के लिए कानूनी मानकों में सामंजस्य की अपील की। यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों के समाधान के लिए प्रभावी और लचीला कन्वेंशन आवश्यक है, जिसमें बच्चे का कल्याण सर्वोपरि हो।



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