युवा शक्ति संयोजन के मुख्य ध्वजवाहक शक्ति सिंह बांदीकुई ने मीरा बाईसा की प्रतिमा संसद भवन में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
जयपुर में युवा शक्ति संयोजन द्वारा कॉनस्टिट्यूशन क्लब में क्षत्राणी समागम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों क्षत्राणियों ने भाग लिया।
युवा शक्ति संयोजन के मुख्य ध्वजवाहक शक्ति सिंह बांदीकुई ने मीरा बाईसा की प्रतिमा संसद भवन में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरमैन मेघराज सिंह रॉयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

वक्ताओं ने मीरा बाईसा के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।
कार्यक्रम में क्षत्राणी ध्वजवाहक कमोद राठौड़, सुनीता कंवर और सीमा कंवर खेड़ी ने समाज और संस्कृति के लिए समर्पण का आह्वान किया। समागम में यह स्पष्ट किया गया कि मीरा बाईसा केवल राजस्थान या राजपूत समाज की नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं।
यह आयोजन मीरा बाईसा, हाड़ी रानी सहल कंवर जी और बाला सती माता रूप कंवर बापजी को समर्पित था। वक्ताओं ने मीरा बाईसा के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि मीरा बाईसा ने नारी शक्ति और भक्ति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।

यह आयोजन मीरा बाईसा, हाड़ी रानी सहल कंवर जी और बाला सती माता रूप कंवर बापजी को समर्पित था।
कार्यक्रम में बाला सती माता जी को भी श्रद्धांजलि दी गई। उन्होंने आधी सदी तक अन्न-जल का त्याग कर तपस्या की थी। सभी ने एकमत से संसद भवन परिसर में मीरा बाईसा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की।
हाड़ी रानी सहल कवर के बलिदान को नमन करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रणभूमि में विजय हेतु पति को दिया अपना शीश – हाड़ी रानी का बलिदान इतिहास की सबसे अद्वितीय कथा है। जिन्होंने सुहाग से बड़ा समझा शौर्य, और जीवन से महान माना धर्म – वही हैं हाड़ी रानी। मंच संचालन तान्या जादौन ने किया।
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