आचार्य वर्धमान सागर जी मजाराज से आशीर्वाद लेते लोग।
प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव अंतर्गत पर्युषण पर्व दशलक्षण महापर्व में श्री दिगंबर जैन नसिया में टोंक आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री इंद्र ध्वज महामंडल विधान का भव्य आयोजन किय
धार्मिक क्रिया करने से पुण्य मिलता है
आचार्य श्री वर्धमान सागर ने उपदेश में बताया कि मध्य लोक के 458 अकृत्रिम जिनालयों की पूजन देवता करते हैं। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य ने बताया कि आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने अपने पुरुषार्थ से इंद्र ध्वज मंडल विधान की रचना की है। कोई भी कार्य तन मन धन के पुरुषार्थ से पूर्ण और सफल होता है। धार्मिक क्रियाओं में द्रव्य दान से ज्यादा समयदान महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक आपदा पुण्य अर्जन से दूर हो जाती है। प्रतिदिन जिनालयों की अभिषेक पूजन भक्ति भाव से करना चाहिये । इंद्र ध्वज महामंडल विधान मन नियंत्रित कर धार्मिक पूजन पुरुषार्थ द्वारा आत्मा को परमात्मा बनाने का एक माध्यम है।

शहर में निकाली गई कलश यात्रा।
जप जाप कलश स्थापित
समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार आचार्य संघ सान्निध्य में सोधर्म इंद्र दिनेश जैन बीना जैन छामुनिया टोंक द्वारा इंद्र ध्वज महामंडल विधान में जप जाप कलश स्थापित किया। बाद में ध्वजारोहण मोहनलाल मदन लाल, पदमचंद, ज्ञानचंद, मनोज कुमार, कमल कुमार छामुनिया, विधानाचार्य पंडित कीर्तिय पारसौला के निर्देशन में किया गया। मंत्रोच्चार आचार्य ने किए। अंकुरा रोपन जाप्य रानी कंटान, राजकुमारी अतार, मीनू दाखिया, प्रमिला पासरोटियां, दीपा अलीगढ़, मीनाक्षी पासरोटियां नीतू पासरोटियां, नीलू बनेठा, पिंकी संघी, शिल्पा कुरेडा,रीना बोरदा सरिता बरवास, शीलू बड़जात्या, अनीता गोयल, शीला बोरदा ने किया। इस मौके पर धर्मचंद दाखिया, राजेश सर्राफ, सुनील सर्राफ, एन जे दाखिया, कमल सर्राफ, जयदीप बड़जात्या, कुंदन आंडरा, ज्ञान संघी, प्रकाश सेठी, विकास अत्तार आदि उपस्थित रहे ।
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